अवैध खनन का काला कारोबार: चौबेपुर थाना क्षेत्र में रात के अंधेरे में अवैध मिट्टी खनन जारी, पुलिस बनी मूकदर्शक
विशाल कुमार, वाराणसी

वाराणसी। चौबेपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गौराउपरवार गांव में इन दिनों अवैध मिट्टी खनन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, रात के अंधेरे में जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई की जा रही है। यह गतिविधि बिना किसी रोक-टोक के चल रही है, जिससे स्थानीय पर्यावरण और कृषि भूमि को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
ग्रामीणों के आरोप और पर्यावरणीय क्षति
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि खनन माफिया रात भर बेखौफ होकर काम करते हैं। जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से खेतों से उपजाऊ मिट्टी निकाली जा रही है, जिससे खेती योग्य जमीन बर्बाद हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि अवैध खुदाई के कारण क्षेत्र की मिट्टी की उर्वरता खत्म हो रही है और आसपास की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। भारी वाहनों के आवागमन से सड़कों पर गड्ढे हो गए हैं, जिससे आम लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह गतिविधि हानिकारक है। मिट्टी खोदने से भूजल स्तर प्रभावित हो सकता है और क्षेत्र में मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है। ग्रामीण चिंतित हैं कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले समय में खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस अवैध खनन की जानकारी कई बार चौबेपुर पुलिस को दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। रात के समय होने वाली इस गतिविधि पर पुलिस की ओर से कोई निगरानी या छापेमारी नहीं की जा रही है। इससे स्थानीय लोगों के मन में पुलिस की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आमजन की परेशानी और सड़कों का बुरा हाल
अवैध मिट्टी खनन के कारण न केवल खेत प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि गांव की सड़कें भी टूट-फूट गई हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और जेसीबी मशीनों के लगातार आवागमन से सड़कें खराब हो चुकी हैं, जिससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और आम वाहनों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो पूरे क्षेत्र की दिनचर्या प्रभावित हो जाएगी।
प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल
इस पूरे मामले में प्रशासन की निष्क्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पोर्टल समेत विभिन्न प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लोग पूछ रहे हैं कि क्या खनन माफियाओं के पीछे कोई बड़ा हाथ है, जिसके कारण पुलिस और प्रशासन कार्रवाई करने से कतराह रहे हैं?
आगे क्या?
अब देखना यह होगा कि वाराणसी प्रशासन और संबंधित खनन विभाग इस गंभीर समस्या पर कब जागता है। अवैध मिट्टी खनन पर तुरंत लगाम लगाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, यह स्थानीय लोगों की नजर में है। यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता तो ग्रामीणों द्वारा बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाने की संभावना है।
यह मामला न केवल पर्यावरण और कृषि की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही का भी सवाल उठाता है। उम्मीद की जाती है कि जल्द ही संबंधित अधिकारी सक्रिय होंगे और गौराउपरवार गांव में अवैध खनन को पूरी तरह रोका जाएगा।




