काशी की रामलीला: शिवपुर में दशरथ सभा और कैकेयी के कोप भवन का मार्मिक मंचन

रिपोर्ट: वीरेन्द्र पटेल।
वाराणसी। काशी की धरती पर चल रही शिवपुर रामलीला रविवार को बेहद भावुक और महत्वपूर्ण प्रसंगों की साक्षी बनी। भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा से लेकर माता कैकेयी के कोप भवन तक की घटनाओं का जीवंत मंचन हुआ, जिसने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।
राजा दशरथ की सभा के दृश्य में गुरु वशिष्ठ, मंत्रियों और अधिकारियों संग राज्याभिषेक की चर्चा दिखाई गई। दशरथ और वशिष्ठ ने राम को युवराज बनाने का निर्णय लिया, जिस पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।
लेकिन इसके बाद मंचन हुआ कैकेयी के कोप भवन का। मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी ने दशरथ से दो वरदान मांगे—भरत को अयोध्या का राज और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास। दशरथ और कैकेयी के बीच संवाद ने सभी का दिल छू लिया। दर्शक मानो स्वयं अयोध्या के उस दर्दनाक क्षण का हिस्सा बन गए। शिवपुर रामलीला सिर्फ़ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। यह हर साल दर्शकों को यह संदेश देती है कि बहकावे और जिद से परिवार में फूट आती है और बड़े संकट जन्म लेते हैं।
इस आयोजन को भव्य बनाने में श्रीरामलीला समिति शिवपुर की पूरी टीम का विशेष योगदान रहा। जिस में अध्यक्ष अतुलेश उपाध्याय, मंत्री संतोष मिश्रा, कोषाध्यक्ष आर्यन सिंह, उपाध्यक्ष विकास सिंह, कार्यकारिणी सदस्य रवि कपूर कल्लू, पृथ्वीराज शर्मा, रोहित मौर्य, त्रिलोकी सेठ, सुधांशु पांडेय, संजय मिश्रा, पार्षद बलरामपुर प्रसाद कनौजिया, विजय केसरी, समारू यादव, आमंत्रित सदस्य दीपक मिश्रा, धर्मेंद्र चौधरी, बृजेश प्रजापति, एडवोकेट उज्जवल वर्मा, नरेंद्र श्रीवास्तव, नरसिंह जायसवाल, और मीडिया से जुड़े आनंद तिवारी, रवि प्रकाश बाजपेई, वीरेंद्र पटेल का उल्लेखनीय सहयोग रहा।
आज का मंचन: सोमवार को रामलीला में श्रीराम का वनगमन, निषाद मिलन और श्रृंगवेरपुर में विश्राम का प्रसंग प्रस्तुत किया जाएगा। यह अध्याय दर्शकों को रामायण के सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षणों से जोड़ेगा।




