काशी विश्वनाथ मंदिर में दबंग सिपाही का हंगामा: वकील दर्शनार्थी को गालियां देकर दी मारपीट की धमकी
नीरज सिंह, वाराणसी

वाराणसी। भगवान विश्वनाथ के धाम में भक्तों की आस्था के बीच एक सिपाही की दबंगई ने सनसनी फैला दी। मंदिर परिसर में तैनात आरक्षक आनंद यादव ने एक वकील दर्शनार्थी के साथ दुर्व्यवहार किया और उसे जान से मारने की धमकी तक दे डाली। घटना 9 मार्च 2026 को सुबह करीब 6 बजे घटी, जब प्रार्थी मंदिर के गर्भगृह में दर्शन के लिए पहुंचा था। प्रार्थी ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की है और आरोपी के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की मांग की है।
घटना का पूरा ब्यौरा: सवाल करने पर भड़का सिपाही, गालियों की बौछार
प्रार्थी, जो जनपद वाराणसी के न्यायालयों में विधि व्यवसाय करते हैं, काशी विश्वनाथ मंदिर के नियमित दर्शनार्थी हैं। मंदिर कार्यपालक द्वारा उन्हें नियमित दर्शन के लिए विशेष पास भी जारी किया गया है। 9 मार्च को सुबह के समय दर्शन के इरादे से वे मंदिर पहुंचे। गर्भगृह के दक्षिणी द्वार पर तैनात सिपाही आनंद यादव दर्शनार्थियों से नियमों का उल्लंघन कर रहा था। सूत्रों के अनुसार, वह अप्रत्यक्ष रूप से पैसे लेकर ही लोगों को प्रवेश दे रहा था, जिससे मंदिर की पवित्र छवि धूमिल हो रही थी।

प्रार्थी ने इस अनियमितता पर सिपाही से सवाल किया और मंदिर की प्रतिष्ठा खराब होने की चिंता जताई। इससे आगबबूला हुए आनंद यादव ने प्रार्थी को अपशब्द कहे और मंदिर के बाहर ‘मिलने’ की धमकी दी। दर्शन पूरा कर प्रार्थी जब मंदिर परिसर में ही थे, तभी सिपाही ने उन्हें रोक लिया। गंदी गालियों की बौछार लगाते हुए उसने प्रार्थी को ‘अपने काम में हस्तक्षेप न करने’ की हिदायत दी। जब प्रार्थी ने खुद को अधिवक्ता बताकर विरोध किया, तो सिपाही ने उनके पेशे पर आधारित अपमानजनक टिप्पणियां की और कचहरी परिसर में आकर ‘मारपीट’ करने की बात कही।
प्रार्थी ने मौके से निकलकर उच्च अधिकारियों से शिकायत करने का प्रयास किया, लेकिन सिपाही ने उन्हें रोक लिया। आनंद यादव ने अपना मोबाइल प्रार्थी को थमा दिया और किसी अज्ञात व्यक्ति से बात कराने को कहा। इस दौरान उसने खुद को ‘दबंग’ बताते हुए अपना आपराधिक इतिहास उजागर किया। मैदागिन क्षेत्र का निवासी होने का हवाला देते हुए बोला, “मैं आनंद यादव पास में ही सैदागिन का रहने वाला। इस बात को मंदिर तक ही रखो भलाई इसी में है नहीं तो मंदिर में आना जाना मुश्किल हो जाएगा।” उसके बाद जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि धमकी देते हुए कहा कि वह अपनी तैनाती खुद कराता है। इन बातों से प्रार्थी भयभीत हो गए और मंदिर से लौट आए।
पुराना इतिहास: दलालों से सांठ-गांठ, धन उगाही का आरोप
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, आनंद यादव विगत कई वर्षों से मंदिर में तैनात हैं। मैदागिन क्षेत्र के निवासी होने के कारण वे दर्शन कराने वाले दलालों से मिलीभगत करते हैं। ‘सुलभ दर्शन’ के नाम पर नियमित रूप से धन उगाही का आरोप है। वह वायरलेस सेट का दुरुपयोग कर ‘स्पर्श दर्शन’ की गलत-बूझूठी सूचना प्रसारित करता है, दर्शन बंद करा देता है और अपने ‘लोगों’ को ही प्रवेश दिलाता है। मंदिर परिसर में खुलेआम मनमानी और दर्शनार्थियों से दुर्व्यवहार उसकी आदत बन चुकी है।
शिकायत और मांग: कड़ी कार्रवाई की अपील
प्रार्थी ने इस घटना का संपूर्ण ब्यौरा उच्च अधिकारियों को सौंपा है। उन्होंने निवेदन किया है कि आरोपी आनंद यादव के विरुद्ध तत्काल विधिक कार्रवाई की जाए। मंदिर प्रशासन और पुलिस उच्चाधिकारियों से अपेक्षा है कि इस मामले की गहन जांच हो और भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। एक वकील दर्शनार्थी पर ऐसी कार्रवाई न केवल व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि मंदिर की आस्था पर भी चोट है।
यह घटना काशी विश्वनाथ मंदिर की पवित्रता पर सवाल खड़े करती है। क्या पुलिस तैनाती में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी? स्थानीय निवासियों और भक्तों की नजरें अब उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं।




