चंदौली में बंदर आतंक के खिलाफ किसानों का अनोखा विरोध, डीएम कार्यालय में छोड़े बंदर
चंदौली में बंदर आतंक के खिलाफ किसानों का अनोखा विरोध, डीएम कार्यालय में छोड़े पकड़े गए बंदर; 24 घंटे में समाधान न हुआ तो शाम तक 50 और बंदर छोड़ने की चेतावनी
रंधा सिंह, चन्दौली
चंदौली/सकलडीहा: जिले के दर्जनों गांवों में बंदरों के लगातार आतंक से त्रस्त किसानों ने बुधवार को अनोखा प्रदर्शन किया। भारतीय किसान संघ (भाकियू-टिकैत) के मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी की अगुवाई में किसानों ने पकड़े गए बंदरों को बोरे में भरकर जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य गेट पर छोड़ दिया। किसानों का आरोप है कि धरहरा, उकनी, सलेमपुर, सकलडीहा, फत्ते, प्रतापपुर, काँटा, विशुनपुरा सहित कई गांवों में बंदरों का कहर बरपा है। महिलाएं, बच्चे और राहगीर हमलों का शिकार बन रहे हैं, जबकि फसलें, सब्जियां और फल पूरी तरह बर्बाद हो रहे हैं। कई किसानों ने सब्जी लगाना तक बंद कर दिया है।
प्रशासन की ढुलमुल नीति से क्षुब्ध किसानों ने बताया कि जिलाधिकारी, वन विभाग और पंचायत राज अधिकारियों के बीच जिम्मेदारी का खेल चल रहा है, लेकिन समाधान कोई नहीं। 24 घंटे बीतने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर शाम तक ठोस व्यवस्था नहीं हुई तो 50 और बंदर डीएम कार्यालय पर छोड़े जाएंगे। भाकियू (टिकैत) ने सभी कार्यकर्ताओं को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। बंदर डिस्पोजल अभियान की जिम्मेदारी अब जिलाध्यक्ष सतीश सिंह चौहान के नेतृत्व में होगी।
किसान नेताओं ने कहा कि बंदरों को पकड़कर वन क्षेत्र में छोड़ा जाए या उचित प्रबंधन किया जाए, वरना आंदोलन और तेज होगा। प्रशासन फिलहाल मौन है, लेकिन डीएम कार्यालय परिसर में बंदरों की मौजूदगी से हड़कंप मच गया है।




