विशाल कुमार, ख़बर भारत
वाराणसी, चिरईगांव ब्लॉक (शिवदशा)।
चौबेपुर थाना क्षेत्र की ग्राम सभा शिवदशा बड़ापुरा इस वक्त भयानक बाढ़ की चपेट में है। गांव के चारों तरफ फैला पानी, डूबी हुई फसलें और घरों में घुसा बाढ़ का पानी, ग्रामीणों के जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर चुका है। गांव के लोगों के अनुसार, पिछले कई दिनों से बाढ़ का कहर जारी है लेकिन प्रशासन अब तक नहीं पहुंचा।
खेत में खड़ी फसलें बर्बाद, सालभर की मेहनत डूबी
यहां के किसानों की मक्का, बाजरा और सब्जियों की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। किसानों का कहना है कि सालभर की मेहनत एक झटके में खत्म हो गई। अब खाने तक को कुछ नहीं बचा। किसान लालचंद निषाद, राजू, नारायण, राजकुमार, कंचन देवी, सुनिता, सूरज, अमित, केशारी, मुकेश और खुशबू जैसे अनेक लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं।
राहत और सर्वे दोनों नदारद
ग्रामीणों ने बताया कि न कोई प्रशासनिक अधिकारी गांव आया और न ही अब तक किसी प्रकार का सर्वे हुआ। न राहत सामग्री, न पीने का पानी, न दवा और न नाव की व्यवस्था — ग्रामीण खुद ही अपनी जान बचाने में लगे हैं।
रातें जागकर काट रहे हैं ग्रामीण
गांव की गलियां पानी में डूबी हैं, लोग अब नावों के सहारे आना-जाना कर रहे हैं। राजकुमारी देवी बताती हैं, “हमारा घर डूब गया है। रातभर जागकर बच्चों को सुरक्षित जगह पर बैठाए रखा, खाना बनाने तक की जगह नहीं बची। क्या हम इंसान नहीं हैं?”
बाढ़ से पीने का पानी तक मयस्सर नहीं
बाढ़ ने सिर्फ घर और खेत नहीं डुबोए, बल्कि हैंडपंप और अन्य पीने के स्रोत भी बेकार हो गए हैं। लोग अब पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी, ग्रामीणों का आक्रोश
ग्रामीणों का साफ कहना है कि प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह लापता है। कोई अधिकारी न तो मौके पर पहुंचा और न ही किसी प्रकार की राहत योजना यहां लागू हो पाई।
ग्रामीणों की मांग:
- तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई जाय
- स्वच्छ पीने के पानी, दवा और नाव की व्यवस्था की जाए
- तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई जाए
- स्वच्छ पीने के पानी, दवा और नाव की व्यवस्था की जाए
- फसलों का सर्वे कर मुआवजा दिया जाए
अब यह सवाल तो उठता है न कि जब ग्रामीण बाढ़ में डूब रहे हैं, प्रशासन कहां सो रहा है?




