दालमंडी प्रकरण पर कांग्रेस ने डीएम से की व्यापारियों के उत्पीड़न रोकने की मांग, कहा – काशी की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का समय
कांग्रेस का प्रशासन से ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक की अपील, व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए पांच सूत्री मांगें पेश

नीरज सिंह, वाराणसी
वाराणसी: बनारस का दिल कहे जाने वाले दालमंडी क्षेत्र में जारी ध्वस्तीकरण, जबरन भूमि अधिग्रहण और व्यापारियों पर प्रशासनिक दबाव के खिलाफ शहर में उबाल आ गया है। इस मुद्दे पर जिला एवं महानगर कांग्रेस कमेटी का एक प्रभावी प्रतिनिधिमंडल, पीड़ित व्यापारियों के साथ वाराणसी के जिलाधिकारी से मिला और सभी कार्रवाइयों को फौरन रोकने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे तथा जिलाध्यक्ष राजेश्वर पटेल ने संभाला, जबकि सैकड़ों व्यापारी और कांग्रेसजन मौके पर उपस्थित रहे।
व्यापारियों की व्यथा सुनकर डीएम ने दिया आश्वासन: पांच दिन में संयुक्त बैठक, सहमति से ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
व्यापारियों ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी पीड़ा खुलकर बयां की – बिना पूर्व सूचना के दुकानों पर बुलडोजर, धमकी भरे नोटिस और जबरन कब्जे से हजारों परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ गई है। कांग्रेस नेताओं ने इसे अमानवीय करार देते हुए ज्ञापन सौंपा। महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने जोर देकर कहा कि दालमंडी काशी की आर्थिक धुरी और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, लेकिन वर्तमान सरकार इसे कॉरपोरेट हितों के लिए बलिदान कर रही है। यह रोजगार छीनने की साजिश है, जो छोटे-मध्यम व्यापार को कुचलने पर उतारू है। बनारस की सदियों पुरानी व्यापारिक परंपरा पर हमला पूरे शहर का अपमान है।

जिलाधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल की बातें गंभीरता से सुनीं और आश्वासन दिया कि पांच दिनों के अंदर भू-स्वामियों, व्यापारियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में सभी पक्षों की सहमति से ही अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, साथ ही व्यापारियों के साथ न्यायोचित व्यवहार सुनिश्चित किया जाएगा। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि दमन नहीं रुका, तो व्यापारी समाज के साथ मिलकर सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा। विकास संवाद से हो, दमन से नहीं – यही पार्टी का संदेश है।
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पांच सूत्री मांगें: ध्वस्तीकरण रोक से लेकर निगरानी समिति तक
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित पांच मांगें रखीं:
1. दालमंडी में ध्वस्तीकरण एवं अधिग्रहण पर तत्काल विराम लगाया जाए।
2. प्रभावित व्यापारियों को वैकल्पिक व्यवस्था या उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
3. भू-स्वामियों की बैठक में सभी फैसले पूर्ण पारदर्शिता से लिए जाएं।
4. पुलिस-प्रशासन द्वारा व्यापारियों पर हो रहे उत्पीड़न की स्वतंत्र जांच हो।
5. व्यापारी हितों की सुरक्षा के लिए स्थायी निगरानी समिति गठित की जाए।
आगे की रणनीति: प्रदेश अध्यक्ष को रिपोर्ट, जरूरत पड़ी तो राज्यव्यापी आंदोलन
कांग्रेस ने घोषणा की कि पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को सौंपी जाएगी। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो राज्य स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल, महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, सजीव सिंह, फसाहत हुसैन बाबू, सतनाम सिंह, अशोक सिंह, वकील अंसारी, राजीव राम, संतोष मौर्य, हसन मेहदी कब्बन, अब्दुल हमीद डोडे, खालिद सिद्दीकी, पीयूष श्रीवास्तव, नरसिंह दास वर्मा, आकाश त्रिपाठी, शहनवाज, अजहर अज्जू, विनीत चौबे, आशिष गुप्ता, अफसर खान, शशी सोनकर, राजकुमार सोनकर सहित सैकड़ों व्यापारी एवं कांग्रेसजन शामिल रहे।




