नगर निगम वाराणसी ने लगाया मांस बिक्री पर प्रतिबंध, पूर्व पार्षद ने कहा ‘संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(g) का उल्लंघन

रिपोर्ट: नीरज सिंह, वाराणसी
वाराणसी। नगर निगम वाराणसी द्वारा नवरात्रि के दौरान शहर में मीट, मांस और मछली की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले के खिलाफ पूर्व पार्षद रमज़ान अली और पार्षद फरज़ाना ने कड़ा विरोध जताया है।
उन्होंने इस निर्णय को भारत के संविधान के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह नागरिकों के व्यवसाय करने के अधिकार (संविधान की धारा 19(1)(g)) और खाने की पसंद की स्वतंत्रता (धारा 19(1)(a)) का सीधा उल्लंघन है। साथ ही, उन्होंने तर्क दिया कि इस प्रतिबंध से उन गरीब व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होगी, जो इस व्यवसाय पर निर्भर हैं, जिससे उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (धारा 21) का हनन होता है।
पूर्व पार्षद रमज़ान अली ने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर शराब की बिक्री जारी रह सकती है, तो मीट और मछली पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया? क्या यह एक समुदाय विशेष को खुश करने की कोशिश नहीं है?” उन्होंने इसे धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाला और संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ बताया।
पार्षद फरज़ाना ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह समानता के अधिकार (धारा 14) का उल्लंघन है, क्योंकि अन्य आपत्तिजनक वस्तुओं की बिक्री पर कोई रोक नहीं लगाई गई। उन्होंने नगर निगम से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की माँग की, अन्यथा इसे समाज में भेदभाव और असंतोष बढ़ाने वाला कदम करार दिया जाएगा।
इस विवाद के बीच नगर निगम प्रशासन ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन, इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।




