Chandauli

पुलिस अधिकारी बनकर ठगों ने पिता से 95 हजार रुपये ऐंठे, लापता बेटी की तहरीर बनी साइबर ठगी का हथियार

चंदन सिंह, चन्दौली

चन्दौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के धानापुर थाना क्षेत्र में साइबर अपराध का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर एक लापता लड़की के पिता से लगभग 95 हजार रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने पीड़ित की मजबूरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाते हुए उसकी बेटी की गुमशुदगी की शिकायत को ही हथियार बना लिया।

पीड़ित के अनुसार, उन्होंने 7 दिसंबर 2025 को अपनी बेटी के लापता होने की लिखित तहरीर धानापुर थाने में दी थी। इसके कुछ समय बाद ही उनके मोबाइल पर वही तहरीर भेजी गई और कॉल कर बताया गया कि उनकी बेटी मिल गई है। ठगों ने खुद को पुलिस विभाग का अधिकारी बताते हुए बेटी को सुरक्षित वापस लाने के नाम पर पैसों की मांग शुरू कर दी।

ठगों ने भरोसा दिलाने के लिए विभिन्न तरह के स्कैनर और दस्तावेज भेजे तथा किस्तों में भुगतान कराने लगे। पीड़ित ने अलग-अलग खातों में रकम भेजी। इनमें शहनाज परवीन को 10,000 रुपये, अनिरिठी सेवा को 12,000 रुपये, एमडी किराना को 24,999 रुपये, नीरज चेतीय को 15,999 रुपये, जय साईं बाबा इंटरप्राइजेज को 19,999 रुपये और केजीएन एजेंसी को 12,000 रुपये भेजे। इस तरह कुल लगभग 95 हजार रुपये की ठगी कर ली गई।

इस घटना के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि थाने में दी गई गोपनीय तहरीर साइबर अपराधियों तक कैसे पहुँची। मामला उजागर होते ही धानापुर पुलिस हरकत में आ गई है और पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है।

धानापुर थाना प्रभारी त्रिवेणी लाल सेन ने बताया कि महिला अपराधों और गुमशुदगी से जुड़े मामलों में मुकदमा दर्ज होने के बाद पीड़ितों को निशाना बनाकर साइबर ठगी के ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति पुलिस के नाम पर मांगे जा रहे पैसों को न दे, क्योंकि पुलिस किसी भी परिस्थिति में इस तरह से धन की मांग नहीं करती।

हालांकि पुलिस विभाग लगातार साइबर अपराधों को लेकर लोगों को जागरूक कर रहा है, इसके बावजूद ऐसे मामलों में कमी नहीं आ रही है। अब पुलिस अधिकारियों के नाम पर पैसे मंगवाए जाने से यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।

फिलहाल पीड़ित न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, वहीं यह मामला आम लोगों के लिए भी एक चेतावनी बनकर सामने आया है कि संकट की घड़ी में भी सतर्कता बेहद जरूरी है।

 

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