Varanasi

बड़ागांव में समीर सिंह हत्याकांड का खुलासा, तीन शूटर गिरफ्तार, गोलीकांड की पूरी साजिश का पुलिस नई किया खुलासा

उलझी हुई गुत्थी, बिखरे सुराग और अंधेरे में बंद सीसीटीवी के बावजूद पुलिस ने सुलझाया हत्याकांड

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी

 

वाराणसी। बड़ागांव थाना क्षेत्र के दयालपुर गांव के पास 25 दिसंबर 2025 की शाम हुए सनसनीखेज गोलीकांड का पुलिस ने सफल अनावरण कर लिया है। इस घटना में निर्दोष बालक समीर सिंह की गोली लगने से मौत हो गई थी, जबकि रामू यादव गंभीर रूप से घायल हो गया था। करीब दो सप्ताह तक चली गहन जांच के बाद बड़ागांव पुलिस ने हत्या में शामिल तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया है।

घटना ने खड़े किए थे कई सवाल

25 दिसंबर की शाम करीब 6–7 बजे दयालपुर गांव के पास अचानक झगड़े के दौरान फायरिंग हुई। गोली लगने से समीर सिंह की मौके पर मौत हो गई, जबकि रामू यादव घायल हो गया। दोनों पीड़ितों का आपस में कोई संबंध नहीं था, न ही वे आरोपियों को पहचानते थे। यही कारण था कि यह मामला पुलिस के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया। घटनास्थल गांव के अंदरूनी रास्ते पर था, जहां बाहरी लोगों की मौजूदगी भी संदिग्ध लग रही थी।

सीसीटीवी बंद, फिर भी नहीं रुकी जांच

घटना के आसपास निजी सीसीटीवी कैमरे बहुत कम थे और पंचायत द्वारा लगाए गए सोलर कैमरे लगातार चार दिन धूप न निकलने के कारण घटना वाले दिन बंद थे। पुलिस ने करीब 100 सीसीटीवी कैमरे खंगाले, 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस का व्यापक इस्तेमाल किया, लेकिन शुरुआती दौर में कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा।

ऑडियो क्लू बना ब्रेकथ्रू

इसी दौरान घटनास्थल से कुछ दूरी पर लगे एक निजी कैमरे में भले ही वीडियो स्पष्ट नहीं था, लेकिन ऑडियो रिकॉर्डिंग में अहम सुराग मिले। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर कुछ संदिग्धों के नाम सामने आए, जिन पर पुलिस ने निगरानी बढ़ाई और आखिरकार पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।

तीन अभियुक्त गिरफ्तार, पूरी कहानी कबूली

9 जनवरी 2026 को बड़ागांव पुलिस ने करन प्रजापति, प्रेमशंकर पटेल और शुभम मौर्य उर्फ लालू मौर्य को गिरफ्तार किया। पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि वे अपने साथियों के साथ शराब पीने के बाद दो मोटरसाइकिलों से लौट रहे थे। दयालपुर गांव के पास पेशाब के लिए रुकने के दौरान पीछे से आ रही एक बाइक आकाश पाल के पैर पर चढ़ गई, जिसके बाद मारपीट शुरू हो गई। शोर मचने पर गांव के लोग इकट्ठा होने लगे, जिससे बचने के लिए फायरिंग की गई। इसी दौरान समीर सिंह को गोली लग गई और उसकी मौत हो गई।

फरार अभियुक्तों की तलाश जारी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि घटना में शामिल कुछ अभियुक्त फरार हैं, जिनका लंबा आपराधिक इतिहास है। इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही गिरफ्तारी की बात कही जा रही है।

25 हजार रुपये का पुरस्कार

इस जघन्य हत्याकांड के सफल अनावरण पर पुलिस उपायुक्त गोमती जोन द्वारा जांच टीम को ₹25,000 का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। पुलिस आयुक्त के निर्देशन और डीसीपी गोमती जोन के सतत पर्यवेक्षण में इस अंधे हत्याकांड को सुलझाना पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

 

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