बिना किसी अधिकारी के डीडीयू जीआरपी के सिपाही करते हैं चेकिंग
जीआरपी के चार सिपाहियों के इशारे पर चलता है पूरा थाना, बज्र और केवाईटी टीम के प्रभारियों का है स्टेशन पर दबदबा!

रंधा सिंह, चन्दौली
चंदौली डीडीयू जंक्शन पर जीआरपी के सिपाही चल रहे हैं पूरा थाना जीआरपी के चार सिपाहियों की मिली भगत से चल रहा है पूरा खेल बज्र टीम के प्रभारी और केवाईटी टीम के प्रभारियों के मिली भगत से यात्री है परेशान बिना किसी अधिकारी या सब इंस्पेक्टर के सिपाही ट्रेनों में करते हैं चेकिंग ड्यूटी में तैनात सब इंस्पेक्टर को नहीं पता रहता है कि सिपाही कर रहे हैं चेकिंग डीडीयू जंक्शन से होने वाली गांजा तस्कर और हवाला कारोबारी से है तगड़ी सेटिंग।
बता दे की डीडीयू की जीआरपी लगातार सवालों के घेरे में रहती है, कभी शराब तस्करी में शामिल तो कभी गांजा तस्करी में शामिल होने की बात सामने आती है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए सरकार की तरफ से स्टेशन पर जीआरपी सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन ये सिपाही अपने मन से ही पूरे स्टेशन को दो भागों में बांट दिए हैं। एक भाग जो एक नंबर प्लेटफार्म और दो नंबर प्लेटफार्म को देखेगा उसे बज्र टीम कहते हैं और जो टीम तीन नंबर से आठ नंबर तक के प्लेटफार्म को देखेगा उसे केवाईटी टीम कहते हैं। इन दोनों टीमों के बकाया एक प्रभारी भी बनाए गए हैं। हर टीम से एक प्रभारी होता है एक टीम की ड्यूटी सुबह 8 से रात 8 बजे तक और दूसरे टीम की ड्यूटी रात 8 से सुबह 8 बजे तक होती है। ऐसे में डीडीयू जंक्शन से होने वाली अवैध गतिविधियों में जीआरपी के कई सिपाहियों के भी नाम चर्चा में आए हैं और चर्चा हो भी क्यों ना लगातार डीडीयू जंक्शन से शराब की तस्करी गांजे की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं।
ऐसे में ये सिपाही बिना किसी सब इंस्पेक्टर या अधिकारी के ही ट्रेनों में जबरी घुसकर चेकिंग करते हैं और यात्रियों को परेशान तक करते हैं। बिना किसी वजह के यात्रियों के समान को खुलवाकर देखते हैं। अगर कोई यात्री इसका विरोध करें तो सिपाही उनसे मारपीट तक पर उतारू हो जाते हैं, यह सारी गतिविधियों की जानकारी जीआरपी प्रभारी निरीक्षक को भी है लेकिन कार्रवाई करने की कौन कहे ये सिपाहियों को रोकने तक की जहमत तक नहीं उठा रहे हैं।
जीआरपी के सिपाही पकड़े गए सामान की पहले करते हैं सेटिंग
डीडीयू जंक्शन पर चेकिंग के दौरान अगर जीआरपी सिपाहियों को गांजा,शराब और हवाला का पैसा मिलता है तो सबसे पहले इसकी सेटिंग की जाती है पैसे का डिमांड किया जाता है अगर बात नहीं बनती है तो उसे थाने तक लाया जाता है, तब जाकर अधिकारियों को पूरी जानकार यह सब करने में सिपाही घंटो बिता देते हैं।




