
आरिफ़ अंसारी, ख़बर भारत
लखनऊ: गौमाता को समर्पित भारत की पहली प्रमुख फीचर फिल्म ‘गोदान’ ने रिलीज के साथ ही काफी चर्चा बटोरी है। 6 फरवरी 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और गौ-संरक्षण के महत्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पेश करती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे पूरे राज्य में टैक्स-फ्री घोषित कर दिया है, जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की। यह फैसला फिल्म के सामाजिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से लिया गया है।
फिल्म के प्रचार-प्रसार प्रभारी शांतनु शुक्ला ने बातचीत में कहा, “‘गोदान’ हम सभी को अपनी संस्कृति और धर्म से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करती है। यह फिल्म वैज्ञानिक तरीके से बताती है कि गौमाता इंसानियत के लिए क्यों जरूरी हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि फिल्म का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को गौमाता के महत्व, उनकी उपयोगिता और गो-सेवा से जोड़ना है। शांतनु शुक्ला ने आगे बताया कि बॉलीवुड इंडस्ट्री वर्तमान में बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां फिल्में अब केवल पारंपरिक पारिवारिक कहानियों तक सीमित नहीं हैं। सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित कंटेंट बढ़ रहा है, और ‘गोदान’ इसका एक उज्ज्वल उदाहरण है।
फिल्म की कहानी एक आधुनिक वैज्ञानिक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो विदेश में पढ़ा-लिखा है और अपनी जड़ों से कट चुका है। लेकिन उसके जीवन में गौमाता (सुरभि नाम की गाय) के आने से उसकी सोच पूरी तरह बदल जाती है। फिल्म पंचगव्य (गौ-उत्पादों से बनी औषधियां) की चिकित्सा शक्ति, गो-सेवा के आध्यात्मिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को हाइलाइट करती है। यह न केवल गौ-संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि भारतीय परंपराओं और प्राकृतिक जीवनशैली को भी बढ़ावा देती है।
निर्माता-निर्देशक विनोद कुमार चौधरी (कामधेनु इंटरनेशनल प्रोडक्शन के तहत) ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गो-संरक्षण के कार्यों से उन्हें फिल्म बनाने की प्रेरणा मिली। फिल्म की टीम ने लखनऊ में सीएम से मुलाकात की और ट्रेलर-पोस्टर लॉन्च किया। विभिन्न संतों, आचार्यों, आरएसएस पदाधिकारियों और अन्य संगठनों से भी आशीर्वाद लिया गया। मुख्य कलाकारों में सहिल आनंद, रोज़ सरदाना, उपासना सिंह, मनोज जोशी और राजेश जायस शामिल हैं। फिल्म की अवधि लगभग 2 घंटे 12 मिनट है।
रिलीज के बाद फिल्म को मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। कुछ समूहों ने विरोध जताया और बैन की मांग की, लेकिन सरकार, गो-भक्तों, आरएसएस और विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों का समर्थन मजबूत है। कई जगहों पर इसे परिवार और युवाओं के लिए अनिवार्य देखने की सलाह दी जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सके।
यदि आप भारतीय संस्कृति, गौमाता की महिमा और सनातन मूल्यों में रुचि रखते हैं, तो ‘गोदान’ को सिनेमाघरों में परिवार के साथ देखना न भूलें। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागरण का माध्यम है।



