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रामलीला में भगवान राम की भव्य बारात और विवाह, भावुक दृश्य ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

काशी की दूसरी सबसे प्रतिष्ठित रामलीला में हुआ सांस्कृतिक वैभव का अद्भुत प्रदर्शन, विदाई दृश्य देख भावुक हुए श्रद्धालु

रिपोर्ट: वीरेन्द्र पटेल।

 

वाराणसी। काशी की पवित्र भूमि पर सनातन धर्म और संस्कृति की अमर गाथा को जीवंत करने वाली शिवपुर रामलीला ने एक बार फिर अपनी भव्यता से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामनगर के बाद वाराणसी की दूसरी सबसे प्रतिष्ठित रामलीला के रूप में विख्यात यह आयोजन भगवान राम की कथा को सांस्कृतिक वैभव के साथ प्रस्तुत करता है। शनिवार को आठवें दिन शिवपुर रामलीला में भगवान राम की बारात, माता सीता के साथ विवाह और उनकी विदाई का भावपूर्ण मंचन हुआ, जिसने सभी के दिलों को छू लिया।

शिवपुर रेलवे क्रासिंग से शुरू हुई भगवान राम की शाही बारात में चारों भाई—राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न—बग्गी पर सवार होकर शामिल हुए। राजा दशरथ, गुरु वशिष्ठ और अन्य बरातियों ने पारंपरिक उत्साह के साथ इस भव्य यात्रा को और आकर्षक बनाया। द्वार पूजा और जलपान के बाद मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को भगवान राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ, जिसे विवाह पंचमी के रूप में जाना जाता है। माता सीता की विदाई का दृश्य अत्यंत भावुक था, जिसने सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करते हुए दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

शिवपुर रामलीला न केवल रामायण की कथा को प्रस्तुत करती है, बल्कि सामुदायिक एकता और भक्ति का संदेश भी फैलाती है। यह आयोजन वाराणसी की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। रविवार को रामलीला के नौवें दिन दशरथ सभा और कोप भवन का मंचन होगा, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

इस आयोजन की सफलता में शिवपुर रामलीला समिति का विशेष योगदान रहा। समिति अध्यक्ष अतुलित उपाध्याय, मंत्री संतोष मिश्रा, कोषाध्यक्ष आर्यन सिंह, उपाध्यक्ष विकास सिंह, कार्यकारिणी सदस्य रवि कपूर कल्लू, पृथ्वीराज शर्मा, रोहित मौर्य, त्रिलोकी सेठ, संजय मिश्रा, आमंत्रित सदस्य दीपक मिश्रा, प्रायोजक सहयोगी महादेव गैस एजेंसी के धर्मेंद्र चौधरी,मोहित श्रीवास्तव, एडवोकेट विकास त्रिपाठी, मीडिया प्रभारी आनंद तिवारी, रवि प्रकाश बाजपेई, वीरेंद्र पटेल, और सुरक्षा व्यवस्था संभालने में सहयोग देने वाले शिवपुर थाना प्रभारी जगदीश कुशवाहा, पुलिस टीम के चन्द्रभूषण यादव, वाशिम खान, संजीत शर्मा, महिला आरक्षी खुशबू सिंह और मयंक सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

यह आयोजन काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है, जो हर साल श्रद्धालुओं और दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

 

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