रिटायर्ड IAS अधिकारी ठगी के जाल में फंसे: साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगे 45 लाख रुपये
आरिफ़ अंसारी, वाराणसी

रिटायर्ड IAS अधिकारी ठगी के जाल में फंसे, साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगे 45 लाख रुपये
वाराणसी। सेवानिवृत्त हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी भूपेंद्र नाथ सिंह साइबर ठगों की नई तरकीब का शिकार हो गए। खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर दो किस्तों में कुल 45 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। मामला सामने आने के बाद कैंट पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगी
सेंट्रल जेल मार्ग स्थित वरुणा गार्डन निवासी रिटायर्ड आईएएस भूपेंद्र नाथ सिंह को बीते 6 और 7 अक्टूबर को दो फोन कॉल आए। कॉल करने वाले ने अपना नाम नीरज ठाकुर बताया और खुद को दिल्ली के बाराखंबा रोड स्थित सीबीआई मुख्यालय का अधिकारी बताया। उसने कहा कि उनके नाम एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में जुड़ा हुआ है और करोड़ों रुपये के अवैध ट्रांजेक्शन की जांच चल रही है।
ठग ने पेशेवर अंदाज में केस नंबर, जांच की डिटेल और डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी। उसने कहा कि बैंक खातों का तुरंत सत्यापन कराना जरूरी है, वरना उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। डर और दबाव में आकर रिटायर्ड अधिकारी ने ठगों द्वारा बताए गए खातों में दो बार में कुल 45 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
शक होने पर पुलिस को दी तहरीर
जैसे ही राशि ट्रांसफर हुई और कुछ देर बाद अफसर को शक हुआ, वे तुरंत कैंट थाने पहुंचे और पूरी घटना की लिखित शिकायत की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया। मामला आईटी एक्ट की धारा 66D के साथ-साथ धोखाधड़ी व आपराधिक षड्यंत्र की संबंधित धाराओं में दर्ज किया गया है।
पुलिस ने शुरू की तकनीकी जांच
पुलिस अब ठगी में इस्तेमाल हुए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और कॉल रिकॉर्ड्स की डिजिटल ट्रेल खंगाल रही है। साइबर सेल की टीम भी मामले में सक्रिय हो गई है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही ठगों तक पहुंच बनाई जाएगी।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर ठग अब पढ़े-लिखे और उच्च पदों पर रहे लोगों को भी अपना निशाना बना रहे हैं। पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि कोई भी अनजान कॉल पर खाता डिटेल या पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।




