
आकाश पाण्डेय, गाज़ीपुर
गाज़ीपुर के सैदपुर तहसील सहित कई इलाकों में पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से लगातार हो रही भारी बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। मानसून के बादल फिर से गरज उठे हैं, और साइक्लोन मोथा के अवशेषों के कारण गाजीपुर, वाराणसी, बलिया और बस्ती सहित अन्य जिलों में मूसलाधार वर्षा ने खेतों को तालाब में तब्दील कर दिया। जो किसान मेहनत से धान की फसल काटकर घरों के आंगन में सुखाने को रखे थे, उनकी उम्मीदें पानी-पानी हो गईं। खेतों में खड़ी फसलें डूब गईं, और कटाई के बाद की धान की बालियां भी कीचड़ में सड़ने लगीं।
एक किसान रामप्रकाश ने आंसुओं से भरी आवाज में बताया, “हमारा पूरा साल का मेहनत एक रात में बह गया। घर खर्च कैसे चलेगा, बच्चों की जरूरत कैसे पूरी होगी, हमारे पास अब कुछ नहीं बचा।” मौसम विभाग के अनुसार, पिछले हफ्ते पूर्वी उत्तर प्रदेश में 15% से अधिक औसत वर्षा दर्ज की गई, जो फसल नुकसान का मुख्य कारण बनी।
सैदपुर के गांवों में बर्बादी की तस्वीर: जॉइंट मजिस्ट्रेट रामेश्वर सुधकार ने किया मौके पर जायजा, राहत कार्यों का दिया आश्वासन
आज, 1 नवंबर 2025 को, सैदपुर के जॉइंट मजिस्ट्रेट रामेश्वर सुधकार ने अपनी टीम के साथ प्रभावित गांवों का दौरा किया। जामिन, देवकली, भांवरा और सैदपुर के अन्य क्षेत्रों में पहुंचकर उन्होंने फसल बर्बादी का जायजा लिया। खेतों में घुटने तक पानी भरा देखकर उनके चेहरे पर उदासी छा गई। सुधकार जी ने किसानों से बातचीत की, उनकी पीड़ा सुनी और तत्काल राहत कार्यों का भरोसा दिलाया। “सरकार किसानों के साथ खड़ी है। हम जल्द ही नुकसान का आकलन कर मुआवजा वितरित करेंगे। बीज, खाद और अन्य सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी,” उन्होंने कहा।
एक बुजुर्ग किसान ने हाथ जोड़कर कहा, “मजिस्ट्रेट साहब का आना ही हमारी हिम्मत बांधने वाला है। लेकिन ये बारिश कब थमेगी?” इस निरीक्षण के दौरान दर्जनों किसानों ने अपनी आपबीती सुनाई, जहां एक ने बताया कि उनके 5 एकड़ धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई, जिससे लाखों का नुकसान हुआ। प्रशासन ने सर्वे टीम गठित की है, जो जल्द ही रिपोर्ट सौंपेगी।
आर्थिक तबाही की कगार पर पूर्वांचल के किसान: कर्ज का बोझ, भूखमरी की आशंका, परिवारों का बुरा हाल
यह बारिश केवल फसलें ही नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी उजाड़ रही है। पूर्वांचल में धान मुख्य फसल है, और इसकी कटाई नवंबर तक पूरी हो जाती है। लेकिन इस बेमौसम वर्षा ने न केवल खड़ी फसलें बर्बाद कीं, बल्कि कटाई के बाद सुखाई जा रही उपज को भी निगल लिया। गाजीपुर जिले में ही सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जहां किसानों को औसतन 50-70% नुकसान का सामना करना पड़ रहा। एक सर्वे के मुताबिक, पूरे उत्तर प्रदेश में इस वर्ष अतिवृष्टि से कृषि विकास दर 3-3.5% तक सिमट सकती है। किसान रामेश्वर यादव रोते हुए बोले, “बैंक का कर्ज चुकाने के लिए तो फसल बेचते थे, अब तो घर बेचना पड़ेगा। बच्चे भूखे सो रहे हैं।” महिलाएं, जो खेतों में मजदूरी करती हैं, अब बेरोजगार हो गईं। कई परिवारों में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि बीमा कवरेज सीमित है और प्रक्रिया जटिल।
पूर्वांचल किसान यूनियन के नेता ने कहा, “सरकार को तुरंत 50 हजार प्रति हेक्टेयर मुआवजा देना चाहिए, वरना विद्रोह होगा।” यह विपदा न केवल आर्थिक, बल्कि भावनात्मक भी है—किसान जो वर्षों की मेहनत एक मुट्ठी चावल के लिए करते हैं, आज खाली हाथ हैं।
जलवायु परिवर्तन का क्रूर चेहरा: पूर्वांचल में बाढ़-टूटी का चक्र, भविष्य की चिंता
यह पहली बार नहीं है जब पूर्वांचल को बेमौसम बारिश ने परेशान किया। जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का पैटर्न बिगड़ गया है—कभी सूखा, कभी बाढ़। गंगा-राप्ती नदियां उफान पर हैं, और नेपाल से आने वाला पानी स्थिति को और जटिल बना रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि साइक्लोन जैसे घटनाक्रम अब सामान्य हो गए हैं, जो फसल चक्र को बाधित कर रहे। लेकिन उम्मीद की किरण जॉइंट मजिस्ट्रेट जैसे अधिकारियों से आ रही है। रामेश्वर सुधकार ने किसानों को सलाह दी कि वे ड्रेनेज सिस्टम मजबूत करें और ऊंचे बेड पर बुआई अपनाएं। सोशल मीडिया पर #SavePurvanchalFarmers ट्रेंड कर रहा है, जहां किसान अपनी दर्दभरी कहानियां साझा कर रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रभावित जिलों के डीएम को निर्देश दिए हैं कि राहत कार्य तेज करें। फिर भी, सवाल वही है—क्या ये आश्वासन किसानों के आंसू पोछ पाएंगे? यह विपदा पूर्वांचल के हृदय को छू गई है, जहां हर खेत एक कहानी कहता है—मेहनत की, हार की, और फिर से उठने की।




