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वाराणसी कैंट स्टेशन पर बढ़ती असामाजिक गतिविधियों पर पुलिस ने दिखाई सक्रियता, युवा फाउंडेशन को दिया सप्ताह भर में कार्रवाई का आश्वासन

श्रुति, ख़बर भारत

वाराणसी। वाराणसी कैंट स्टेशन के आस-पास देह व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य असामाजिक कार्यकलापों में बढ़ोतरी को लेकर नोटिस में आई बढ़ती चिंताओं के बाद शहर के युवा फाउंडेशन और कई सामाजिक संगठनों ने प्रशासन के समक्ष कड़ा रुख अपनाया। संगठनों ने कल धरना देने का निर्णय लिया था और इसकी सूचना पुलिस कमिश्नर, वाराणसी को एक पत्र के माध्यम से भेज दी गई।

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पत्र में कैंट स्टेशन क्षेत्र में वर्तमान हालात — महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार, खुले आम असामाजिक गतिवधियां और इलाके में सुरक्षा-वातावरण खराब होने की बात का उल्लेख किया गया था। प्रतिनिधियों का कहना था कि आए-दिन शिकायतें आ रही हैं और स्थानीय नागरिक एवं आवागमन करने वाले लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसी को लेकर युवा फाउंडेशन और अन्य संस्थाओं ने तत्काल सक्रियता की मांग की।

मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल तथा डीसीपी काशी गौरव बंसवाल के निर्देश पर सिगरा थाना अध्यक्ष ने युवा फाउंडेशन की अध्यक्ष सीमा चौधरी और पदाधिकारियों/ प्रतिनिधियों से तुरंत मुलाकात की। मुलाकात में पुलिस प्रशासन ने उच्च अधिकारियों के साथ बात कर सभी मांगे पत्र में उठाए गए मुद्दों को प्राथमिकता पर लेकर शीघ्र कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। पुलिस ने आश्वासन देते हुए प्रत्यक्ष और समन्वित कदम उठाने का भरोसा दिलाया।

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युवा फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के अनुसार उन्होंने प्रशासन से विशेष तौर पर इलाके में पैट्रोलिग बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नकेल कसने, ज़रूरी रेड/निरीक्षण करने तथा पीड़ितों के लिए त्वरित शिकायत निवारण की व्यवस्था करने की मांग की। पुलिस ने इन मांगों पर प्रभावशाली कार्रवाई करने का आश्वासन देते हुए सप्ताह भर का समय मांगा है।

पुलिस प्रशासन ने कहा है कि इस अवधि में वे संदिग्ध ठिकानों की पहचान, प्रवर्तन कार्रवाई और स्थानीय निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। सिगरा थाना की ओर से इस दौरान निगरानी बढ़ाने तथा शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गए हैं।

युवा फाउंडेशन और शामिल सामाजिक संस्थाओं ने पुलिस के आश्वासन का स्वागत करते हुए कहा कि यदि निर्धारित सप्ताह के भीतर उनकी मांगे पूरी नहीं की गईं तो वे पहले से निर्धारित धरने व अन्य आंदोलनकारी विकल्पों पर वापस लौटने के लिए बाध्य होंगे। स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन से शीघ्र और दृढ़ कदम की मांग की है ताकि क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और सामान्य नागरिकों को होने वाली असुविधा समाप्त हो।

मामले की निगरानी जिला प्रशासन भी कर रहा है और दोनों पक्षों ने संवाद कायम रखने तथा सामूहिक समाधान निकालने पर सहमति जताई है। शहर प्रशासन व पुलिस के अगली सप्ताह की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायतकर्ताओं की अपेक्षाएँ किस हद तक पूरी हो पाई।

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