Varanasi

सर्वधर्म श्रद्धांजलि सभा: पोप फ्रांसिस को श्रद्धांजलि, शांति और सह-अस्तित्व का दिया गया संदेश

रिपोर्ट: श्रुति सूर्यवंशी 

वाराणसी। पोप फ्रांसिस के निधन पर वाराणसी में एक भव्य सर्वधर्म श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता वाराणसी धर्मप्रांत के धर्माचार्य महामहिम यूजीन जोसेफ ने की। सभा में विभिन्न धर्मों के प्रमुख संतों, विचारकों और शिक्षाविदों ने भाग लिया और पोप फ्रांसिस के जीवन तथा उनके संदेशों को श्रद्धांजलि दी।

विश्व बंधुत्व और पर्यावरण की चिंता

संकट मोचन मंदिर के महंत विश्वंभर नाथ मिश्र ने पोप द्वारा लिखित दस्तावेज़ ह्यूमन फ्रेटरनिटी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रकृति और मानवता की रक्षा अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि वैश्विक दायित्व है। उन्होंने सह-अस्तित्व और पर्यावरणीय चेतना को जीवनशैली में उतारने का आग्रह किया।

धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक समरसता का आह्वान

मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने धार्मिक सहिष्णुता की सराहना करते हुए कहा कि आज का समय घृणा नहीं, संवाद और सम्मान का है। उन्होंने धार्मिक कट्टरता को अस्वीकार करने की अपील की।

समान गरिमा और सेवा का संदेश

रामकृष्ण अद्वैत आश्रम के अध्यक्ष स्वामी विश्वात्मानंद ने पोप के संदेशों को धार्मिक मूल्यों के रूप में व्याख्यायित किया। उन्होंने जाति-धर्म से परे सेवा और समानता की भावना को अपनाने की बात कही।

शांति और उम्मीद की ओर इशारा

डॉ. मुहम्मद आरिफ और प्रोफेसर दीपक मलिक जैसे वक्ताओं ने पोप फ्रांसिस के जीवन को एक ऐसे प्रकाशपुंज के रूप में बताया, जो आशा और शांति के पथ पर मानवता को अग्रसर करता है।

प्रकृति की रक्षा का आह्वान

प्रोफेसर अलका सिंह ने ‘लौदातो सी’ (Laudato Si) दस्तावेज़ के हवाले से कहा कि पृथ्वी केवल हमारा घर नहीं, हमारी ज़िम्मेदारी भी है। उन्होंने जलवायु संकट पर वैश्विक चिंतन की आवश्यकता बताई।

बौद्ध दृष्टिकोण से श्रद्धांजलि

तिब्बती विश्वविद्यालय, सारनाथ के प्रोफेसर भंते रमेशचंद्र नेगी ने पोप को “दैवीय ज्योति” बताते हुए कहा कि उन्होंने मानवता को करुणा और प्रेम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

धर्मगुरुओं और नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति

सभा में ख्रीस्तीय समुदाय, बौद्ध समाज, ब्रह्मकुमारी, मुस्लिम प्रतिनिधि, हिन्दू संन्यासी और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में पोप फ्रांसिस के विचारों को युगधर्म बताया।

सभा का समापन धर्माचार्य युजीन जोसेफ के धन्यवाद ज्ञापन और पोप फ्रांसिस की आत्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ।

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