
गाजीपुर जिले के नोनहरा थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया है। बिजली के खंभे लगाने के विरोध में धरना दे रहे दिव्यांग भाजपा कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय उर्फ जोखू (35 वर्ष) की कथित पुलिस पिटाई से मौत हो गई, जिसके बाद इलाके में तनाव व्याप्त हो गया। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी सख्ती बरती है। वाराणसी रेंज के डीआईजी वैभव कृष्ण ने गुरुवार को घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे प्रकरण की समीक्षा की, जबकि पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज रजा ने मजिस्ट्रेटीयल जांच के लिए जिलाधिकारी अविनाश कुमार को पत्र भेजा है। यह घटना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि ग्रामीणों के आक्रोश को भी जन्म दे रही है।
घटना का पूरा विवरण: धरने से मौत तक का सफर
घटना 9 सितंबर 2025 की रात की है, जब गठिया गांव के निवासी ओंकार राय और अरविंद राय के बीच बिजली के खंभे लगाने को लेकर विवाद हुआ। ग्रामीणों ने इसका विरोध जताते हुए नोनहरा थाने के बाहर धरना देना शुरू कर दिया। धरने में भाग लेने वाले दिव्यांग भाजपा कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय (पुत्र गिरजा उपाध्याय, ग्राम चकरुकुन्दीपुर) भी शामिल थे। आरोप है कि रात करीब डेढ़ बजे थानाध्यक्ष वेंकटेश तिवारी ने थाने की लाइटें बंद करा दीं और अंधेरे का फायदा उठाकर प्रदर्शनकारियों पर बेरहमी से लाठीचार्ज कर दिया।
इस हमले में सियाराम, राजेश राय बागी, मिंटू सिंह समेत कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। खासकर दिव्यांग सियाराम भाग नहीं पाए और जमीन पर गिर पड़े, जहां पुलिसकर्मियों ने उन पर विशेष रूप से हमला किया। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया, लेकिन सियाराम की हालत बिगड़ती चली गई। 11 सितंबर 2025 की भोर करीब तीन बजे चकरुकुन्दीपुर गांव में ही उनकी मौत हो गई। मृतक के शव को घर के दरवाजे पर ही रखा गया, क्योंकि परिजनों ने पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मृतक के पिता गिरजा शंकर उपाध्याय ने बताया, “मेरा बेटा दिव्यांग था, फिर भी पुलिस ने बेरहमी से पीटा। हम न्याय चाहते हैं।” मां भागीरथी देवी और भाभी सुनीता ने भी पुलिस की क्रूरता की कड़ी निंदा की। ग्रामीणों ने शव के साथ थाने का घेराव किया और मुआवजे व दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की। शाम तक शव दरवाजे पर ही पड़ा रहा, जिससे इलाके में बवाल मच गया। भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपील की।
डीआईजी वैभव कृष्ण की समीक्षा: उच्च स्तरीय जांच का आगाज
इस संवेदनशील मामले में वाराणसी रेंज के डीआईजी वैभव कृष्ण ने 11 सितंबर 2025 को नोनहरा थाना पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना किया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज रजा, जिलाधिकारी अविनाश कुमार समेत संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे प्रकरण की गहन समीक्षा की। डीआईजी ने थाने के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, गवाहों से बातचीत की और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जांच में पारदर्शिता बरती जाए।
इस दौरान डीआईजी वैभव कृष्ण, एसपी डॉ. ईरज रजा और डीएम अविनाश कुमार थाने के बाहर ग्रामीणों से भी बातचीत करते नजर आए। तस्वीरों में तीनों अधिकारी समीक्षा करते हुए दिख रहे हैं, जो घटना की गंभीरता को दर्शाती हैं। डीआईजी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: 11 कर्मियों पर गिरी गाज
पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज रजा ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की। इसमें 6 कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि 5 को लाइन हाजिर (अन्य विभागों में अटैच) किया गया। एसपी ने बताया कि यह कार्रवाई जांच को प्रभावित न करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए की गई है। निलंबित और लाइन हाजिर कर्मियों की सूची निम्नलिखित है:
निलंबित पुलिसकर्मी:
1. प्रभारी निरीक्षक वेंकटेश तिवारी, थाना नोनहरा, गाजीपुर
2. उप निरीक्षक अवधेश कुमार राय, थाना नोनहरा, गाजीपुर
3. मुख्य आरक्षी नागेंद्र सिंह यादव, थाना नोनहरा, गाजीपुर
4. आरक्षी धीरज सिंह, थाना नोनहरा, गाजीपुर
5. आरक्षी अभिषेक पांडेय, थाना नोनहरा, गाजीपुर
6. आरक्षी राकेश कुमार, थाना नोनहरा, गाजीपुर
लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मी:
1. उप निरीक्षक कमलेश गुप्ता, थाना नोनहरा, गाजीपुर
2. उप निरीक्षक जुल्फिकार अली, थाना नोनहरा, गाजीपुर
3. आरक्षी मुलायम सिंह, थाना नोनहरा, गाजीपुर
4. आरक्षी राघवेंद्र मिश्रा, थाना नोनहरा, गाजीपुर
5. आरक्षी राजेश कुमार, थाना नोनहरा, गाजीपुर
एसपी ने कहा, “मजिस्ट्रेटीयल जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।”
मजिस्ट्रेटीयल जांच: फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन
पुलिस अधीक्षक ने घटना की निष्पक्ष जांच के लिए जिलाधिकारी अविनाश कुमार को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेटीयल जांच के आदेश दिए हैं। डीएम ने तुरंत एक मजिस्ट्रेट को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है, जो गवाहों के बयान दर्ज करेगी, मेडिकल रिपोर्ट जुटाएगी और घटना के कारणों का पता लगाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। ग्रामीणों ने मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी की भी मांग की है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष ने घेरा, सपा-अखिलेश का तीखा प्रहार
इस घटना ने राजनीतिक हलचल भी मचा दी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “आपसी और अंदरूनी लड़ाई का खामियाजा कोई भी क्यों भुगते? पुलिस की बर्बरता से एक निर्दोष दिव्यांग कार्यकर्ता की जान चली गई।” कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी पीड़ित परिवार से मिलने का ऐलान किया। भाजपा ने अपनी ओर से शोक व्यक्त किया, लेकिन विपक्ष इसे ‘अफसरशाही का दुरुपयोग’ बता रहा है।
स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों ने थाने का घेराव किया, लेकिन भारी पुलिस बल के आगे शांतिपूर्ण प्रदर्शन ही कर सके। एशियन न्यूज यूपी जैसे मीडिया आउटलेट्स ने घटना की लाइव कवरेज की, जिसमें डीआईजी की समीक्षा के वीडियो भी वायरल हुए।
निष्कर्ष: न्याय की उम्मीद और सबक
यह घटना पुलिस-नागरिक संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। डीआईजी वैभव कृष्ण की समीक्षा और त्वरित कार्रवाई से पीड़ित परिवार को कुछ राहत मिली है, लेकिन मजिस्ट्रेटीयल जांच ही सच्चाई उजागर करेगी। प्रशासन ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात की है। गाजीपुर के इस कांड ने न केवल स्थानीय स्तर पर हलचल मचा दी, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में पुलिस सुधार की बहस छेड़ दी है। उम्मीद है कि दोषी सजा पाएंगे और ऐसी घटनाओं का दोबारा न होना सुनिश्चित होगा।




