शिवपुर रामलीला: नौवें दिन श्री राम के वनगमन और निषाद मिलन का हृदयस्पर्शी मंचन
वीरेंद्र पटेल, वाराणसी

वाराणसी, 15 सितंबर 2025: काशी की पावन धरती पर शिवपुर में आयोजित परंपरागत रामलीला सनातन धर्म की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को जीवंत कर रही है। सोमवार को रामलीला के नौवें दिन प्रभु श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन, निषादराज से हृदयस्पर्शी मिलन और श्रृंगवेरपुर में विश्राम के प्रसंग का भव्य मंचन हुआ। इस मंचन ने उपस्थित हजारों दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया, और राम-निषाद मित्रता की अमर गाथा ने भक्ति का अनुपम रंग बिखेरा।
वनगमन और निषादराज से मिलन का मार्मिक प्रसंग
रामलीला के इस प्रसंग में श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या से वन की ओर प्रस्थान करने का मार्मिक चित्रण किया गया। अयोध्यावासियों का शोक और प्रभु के प्रति उनकी अगाध भक्ति मंच पर जीवंत हो उठी। श्रृंगवेरपुर पहुंचकर प्रभु श्री राम का अपने सखा निषादराज गुह से मिलन हुआ। निषादराज ने प्रभु, माता सीता और लक्ष्मण का हार्दिक स्वागत किया और उनके प्रति अपनी निष्ठा और प्रेम को व्यक्त किया। उन्होंने कुछ शर्तों के साथ प्रभु को गंगा पार करवाने का वचन दिया, जो उनकी भक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है।
श्रृंगवेरपुर में प्रभु ने सिंसुपा वृक्ष के नीचे विश्राम किया, जहां लक्ष्मण ने पहरेदारी की। यह दृश्य राम और निषादराज की मित्रता को दर्शाता है, जो श्रृंगवेरपुर को एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में स्थापित करता है। निषादराज का प्रभु के प्रति समर्पण और उनकी सादगी देख दर्शक भावुक हो उठे। मंचन में तुलसीदास जी की रामचरितमानस की चौपाइयों ने इस दृश्य को और भी जीवंत बना दिया।
कलाकारों का मंत्रमुग्ध कर देने वाला प्रदर्शन
रामलीला के मंचन में कलाकारों ने अपने अभिनय और गायन से दर्शकों का मन मोह लिया। भोलानाथ शर्मा, वंश नारायण, अनिल केसरी, रामबली पांडेय, दीनानाथ सेठ (मृदंग वादक), उज्जवल चौरसिया, नाथू यादव, जवाहिर लाल मौर्य, अनुराग मिश्रा, सागर गोड़, मनोज केसरी, चंदन और बाबू केसरी ने एक सुर में रामचरितमानस के वचनों का गायन किया। उनका यह प्रदर्शन इतना प्रभावशाली था कि दर्शक तालियों और जयघोष के साथ भक्ति में डूब गए। मृदंग की थाप और मधुर गायन ने माहौल को और भी आध्यात्मिक बना दिया।
श्री रामलीला सेवा समिति का योगदान
शिवपुर की रामलीला का आयोजन श्री रामलीला सेवा समिति के तत्वावधान में किया जा रहा है, जो सनातन धर्म की परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। समिति के उपाध्यक्ष विकास सिंह, मंत्री संतोष मिश्रा, कोषाध्यक्ष आर.एन. सिंह, आय-व्यय निरीक्षक पृथ्वीराज शर्मा और अन्य कार्यकारिणी सदस्यों ने इस आयोजन को भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शिवपुर के रामभक्त इस धार्मिक आयोजन को न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में देखते हैं, बल्कि इसे भक्ति और एकता का प्रतीक मानते हैं।
दसवें दिन का आगामी प्रसंग
मंगलवार, 16 सितंबर 2025 को रामलीला के दसवें दिन के मंचन में सुमंत की विदाई, प्रभु श्री राम का केवट से संवाद, भारद्वाज आश्रम में विश्राम और गंगा पार करने का नौका विहार का प्रसंग प्रस्तुत किया जाएगा। यह दृश्य केवट की भक्ति और प्रभु श्री राम के दयालु स्वभाव को उजागर करेगा, जो दर्शकों के लिए एक और भावपूर्ण अनुभव होगा।
सनातन धर्म की अमर गाथा
शिवपुर की रामलीला न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह सनातन धर्म की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को जीवंत करने का एक सशक्त माध्यम है। श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन और निषादराज से मिलन के प्रसंग ने भक्तों के हृदय में भक्ति और श्रद्धा का संचार किया। यह आयोजन काशी की सांस्कृतिक धरोहर को और समृद्ध कर रहा है, और रामलीला सेवा समिति के प्रयासों से यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहेगी।




