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वाराणसी घाटों पर नाविकों की लापरवाही: यात्रियों की जान खतरे में डालकर चलाई जा रही है नावें

वाराणसी: पर्यटन नगरी वाराणसी में गंगा घाटों पर नाव संचालन में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। कई नाविक बिना लाइफ जैकेट के यात्रियों को नाव में बैठाकर गंगा की सैर करा रहे हैं, जबकि कुछ नावों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जा रही हैं। यह स्थिति किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घाटों पर सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।

सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ रही

वाराणसी के प्रमुख घाटों जैसे दशाश्वमेध, अस्सी, मानमंदिर आदि पर रोजाना हजारों श्रद्धालु और पर्यटक गंगा आरती देखने और घाट दर्शन के लिए नाव का सहारा लेते हैं। लेकिन नाविकों द्वारा सुरक्षा नियमों की अनदेखी चिंता का विषय बनी हुई है। न तो सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट प्रदान की जा रही है और न ही ओवरलोडिंग पर कोई प्रभावी रोक लगाई जा रही है।

हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां बिना लाइफ जैकेट के नाव संचालन के कारण पुलिस ने नावें जब्त की हैं। जनवरी 2025 में अस्सी घाट पर एक नाव को क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने और लाइफ जैकेट न प्रदान करने के आरोप में सीज किया गया था। इसके बावजूद लापरवाही जारी है।

हालिया हादसे ने बढ़ाई चिंता

जनवरी 2025 में मानमंदिर घाट के सामने गंगा में दो नावों की टक्कर से एक नाव पलट गई। इसमें सवार दर्जनों श्रद्धालु पानी में गिर गए। गनीमत रही कि अधिकांश ने लाइफ जैकेट पहनी हुई थी, जिससे सभी को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना के बाद नाविकों पर कार्रवाई हुई और कुछ के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई, लेकिन इसके विरोध में नाविकों ने हड़ताल भी की।
ऐसे हादसे बताते हैं कि ओवरलोडिंग और सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी कितनी खतरनाक हो सकती है।

जिम्मेदारी है किसकी?

सवाल यह उठता है कि इस लापरवाही की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? नाविकों की मनमानी तो स्पष्ट है, लेकिन घाटों पर तैनात जल पुलिस, एनडीआरएफ और संबंधित विभागों की निगरानी में कमी भी नजर आती है। प्रशासन द्वारा समय-समय पर बैठकें कर नियमों का पालन कराने के निर्देश दिए जाते हैं, जैसे सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट अनिवार्य रूप से पहनाना और क्षमता से अधिक सवारियां न बैठाना। लेकिन जमीनी स्तर पर इनका सख्ती से पालन नहीं हो रहा।

नाविक संघ का कहना है कि पर्यटक खुद लाइफ जैकेट पहनने से मना करते हैं, जबकि पर्यटक नाविकों पर आरोप लगाते हैं कि वे जल्दबाजी में नियम तोड़ते हैं। दोनों पक्षों की लापरवाही यात्रियों की जान जोखिम में डाल रही है।
प्रशासन कब लेगा संज्ञान?

वाराणसी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गंगा नाव यात्रा प्रमुख आकर्षण है, लेकिन सुरक्षा की अनदेखी से इसकी छवि खराब हो रही है। महाकुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब प्रभावी कार्रवाई करता है और जिम्मेदारों को दंडित कर सुरक्षा मानकों का सख्त पालन सुनिश्चित करता है।

यात्रियों से अपील है कि वे खुद भी सतर्क रहें और बिना लाइफ जैकेट के नाव में न बैठें। सुरक्षा सबसे पहले!

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