सलामी या सत्ता प्रदर्शन? कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर देने पर उठे सवाल
सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने जताई कड़ी आपत्ति, पुलिस की भूमिका पर बहस तेज

बहराइच जनपद में कथावाचक पंडरीक गोस्वामी को पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस अधीक्षक आर.एन. सिंह की मौजूदगी में पूरी परेड के साथ सलामी दिए जाने और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि वर्दीधारी पुलिस बल औपचारिक परेड के साथ कथावाचक को सलामी दे रहा है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम की रील भी बनाई गई है। इसके बाद यह बहस शुरू हो गई है कि क्या पुलिस बल का उपयोग किसी व्यक्ति विशेष या धार्मिक प्रवचनकर्ता के सम्मान और प्रचार के लिए किया जाना उचित है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नगीना से निर्दलीय सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने कड़ा ऐतराज़ जताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल का कार्य संविधान, कानून-व्यवस्था और जनता की सुरक्षा से जुड़ा है, न कि किसी व्यक्ति विशेष के महिमामंडन से। सांसद ने इसे पुलिस की गरिमा और संवैधानिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताया।
चंद्रशेखर आज़ाद ने सवाल उठाया कि यदि धार्मिक या निजी आयोजनों में इस प्रकार से गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने की परंपरा शुरू हो गई, तो इससे पुलिस की निष्पक्षता और पेशेवर छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से इस पूरे प्रकरण पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
वहीं, प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। जानकारों का कहना है कि गार्ड ऑफ ऑनर जैसी औपचारिक सैन्य-पुलिस परंपराएँ केवल संवैधानिक पदों, शहीदों या विशेष सरकारी अवसरों तक सीमित होनी चाहिए।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।



