VDA के पूर्व जोनल अधिकारी शिवाजी मिश्रा पर गंभीर आरोप, सील भवन में ही G+2 की जगह G+4 का कराया गया अवैध निर्माण
सील तोड़कर जारी रहा G+4 निर्माण, लगातार शिकायतों के बाद भी जोनल अधिकारी, JE ने नहीं की कार्यवाही, शिवपुर पुलिस पर भी मिलीभगत का गंभीर आरोप

नीरज सिंह, वाराणसी
वाराणसी में सुनियोजित विकास की जिम्मेदारी जिस वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) पर है, उसी के अधिकारियों पर अवैध निर्माण को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। VDA जोन-1 के पूर्व जोनल अधिकारी शिवाजी मिश्रा पर एक बार फिर सील किए गए भवन में अवैध निर्माण कराए जाने का मामला सामने आया है, जिसने प्राधिकरण की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

मामला शिवपुर थाना क्षेत्र के वार्ड–शिवपुर, मौजा–भरलाई का है, जहां सेंट जोसेफ स्कूल के पास मानकों के विपरीत निर्माण किया गया। जानकारी के अनुसार, सुशील सिंह नामक व्यक्ति द्वारा जी+2 तल का मानचित्र स्वीकृत कराया गया था, लेकिन सेटबैक और रोड वाइडनिंग के नियमों को ताक पर रखते हुए पहले जी+3 और फिर जी+4 तक निर्माण करा लिया गया। इस दौरान VDA को कई शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता होती रही।
VDA के रिकॉर्ड के अनुसार, पूर्व में शमन मानचित्र दाखिल किए जाने के बाद भी निर्माण कार्य जारी रखा गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की सुसंगत धाराओं के तहत नोटिस जारी कर पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद अवैध निर्माण नहीं रुका। अंततः 24 सितंबर 2025 को भवन को सील किया गया। इस कार्रवाई के दौरान जोनल अधिकारी शिवाजी मिश्रा, अवर अभियंता रोहित कुमार, प्रवर्तन दल और सुपरवाइजर मौके पर मौजूद रहे।
हालांकि, सील की यह कार्रवाई महज कागजी साबित हुई। आरोप है कि केवल दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को सील तोड़कर न सिर्फ उसे पेंट कर ढक दिया गया, बल्कि चौथे तल का निर्माण कार्य दोबारा शुरू करा दिया गया। महीने भर यह निर्माण चलता रहा, इसकी शिकायत व्यक्तिगत रूप से पूर्व जोनल अधिकारी शिवाजी मिश्रा से होती रही लेकिन उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि *“हमने तो सील कर दिया है, शिवपुर पुलिस की अभीरक्षा में दे दिया गया है, अब पुलिस देखे।”
इसके बाद जब शिवपुर थाने में शिकायत की गई तो थाना प्रभारी ने भी सिर्फ “देखते हैं” कहकर मामला टाल दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की कथित कृपा से निर्माण कार्य बेरोकटोक चलता रहा और चौथे तल का निर्माण भी पूरा कर लिया गया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस अवैध निर्माण के बगल में ही एक ग्राउंड फ्लोर का निर्माण हो रहा था जिसको VDA के द्वारा सील कर दिया और आज तक वहां पर काम नहीं हुआ, लेकिन इस अवैध निर्माण पर VDA के अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि इस पूरे मामले में पूर्व जोनल अधिकारी से लेकर जेई तक की मिलीभगत है और स्थानीय पुलिस भी मूकदर्शक बनी हुई है।
अब देखना यह है कि इस गंभीर मामले में VDA उच्चाधिकारियों द्वारा क्या ठोस कार्रवाई की जाती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।




