Chandauli

चंदासी कोयला मंडी में फर्जी फर्मों के सहारे करोड़ों का काला कारोबार, जीएसटी चोरी का बड़ा खेल उजागर

मुग़लसराय कोयला मंडी में बोगस फर्म के सहारे चल रहा है करोड़ का कारोबार धड़ल्ले से, फर्जी फर्म बनाकर कोयला माफिया कर रहे है जीएसटी चोरी

रंधा सिंह, चन्दौली

 

  • बोगस कंपनियों के जरिए धड़ल्ले से चल रहा अवैध कोयला व्यापार
  • जीएसटी टीम की जांच में कई फर्मों का कोई अस्तित्व नहीं मिला
  • एशिया की बड़ी कोयला मंडी में काले कारोबार का फैलता जाल
  • बिहार-झारखंड के गरीबों के नाम पर खोली गई फर्जी कंपनियां
  • करोड़ों रुपये के टैक्स की चोरी और बिलिंग में हेराफेरी
  • छापेमारी के बावजूद कार्रवाई न होने से बढ़े माफियाओं के हौसले
  • लिंकेज कोयले की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध सप्लाई
  • संगठित नेटवर्क के दम पर फल-फूल रहा कोयला माफिया तंत्र
  • गरीबों का नाम इस्तेमाल कर अवैध मुनाफाखोरी
  • पारदर्शिता के लिए सख्त निगरानी और ठोस कार्रवाई की जरूरत

 

चंदौली। मुगलसराय स्थित चंदासी कोयला मंडी कोयले के अवैध कारोबार का गढ़ बनता जा रहा है। शासन के निर्देश पर स्टेट जीएसटी की टीम एक फर्म की जांच के लिए चंदासी कोयला मंडी पहुंची, लेकिन जांच-पड़ताल के दौरान टीम को उस फर्म का कोई भी कार्यालय मंडी में नहीं मिला।

अवैध कारोबार का खुलासा

यह घटना मुगलसराय कोयला मंडी में चल रहे बड़े पैमाने के गड़बड़ियों को एक बार फिर उजागर करती है। सूत्रों के अनुसार, कोयला माफिया बिहार और झारखंड के गांवों से आए गरीब, लाचार और असहाय लोगों के नाम पर फर्जी फर्में बनाते हैं। इन फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की जाती है। जब जीएसटी टीम छापेमारी करने पहुंचती है, तो हैरानी की बात यह है कि मंडी में फर्म का कोई वजूद ही नहीं मिलता। फर्जी फर्म चलाने वाले आसानी से बच निकलते हैं, जबकि शासन की कई बार की छापेमारियों और कार्यवाहियों के बावजूद यह सिलसिला जारी है।

एशिया की सबसे बड़ी कोयला मंडी

मुगलसराय कोयला मंडी को एशिया का सबसे बड़ा कोयला मंडी माना जाता है। यहां रोजाना हजारों टन कोयले का लेन-देन होता है। लेकिन इस विशाल बाजार में जीएसटी चोरी, बोगस फर्मों के सहारे कारोबार और लिंकेज कोयले (अवैध स्रोत से प्राप्त कोयला) का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। कई बार करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस और प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई है।

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जीएसटी टीम की बार-बार छापेमारी

शासन के निर्देश पर स्टेट जीएसटी की टीम कई बार छापेमारी कर चुकी है। कुछ मामलों में लोगों के खिलाफ कार्यवाही भी हुई है, जैसे जीएसटी चोरी पर लाखों-करोड़ों रुपये वसूले गए। उदाहरण के लिए, पहले के छापों में व्यापारियों से 1.12 करोड़ रुपये तक जीएसटी जमा कराए गए, जबकि कुछ मामलों में बोगस फर्मों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए। फिर भी फर्जी फर्मों का जाल इतना मजबूत है कि जांच टीम पहुंचते-पहुंचते सब गायब हो जाता है।

गरीबों के नाम पर माफिया का खेल

सूत्र बताते हैं कि कोयला माफिया मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के दूरदराज के गांवों से गरीब मजदूरों या आम लोगों के नाम और पहचान का दुरुपयोग करते हैं। इन नामों पर फर्म रजिस्टर कराई जाती है, करोड़ों का कारोबार दिखाया जाता है, लेकिन वास्तव में ये फर्म सिर्फ कागजी होती हैं। जीएसटी चोरी, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की फर्जी क्लेमिंग और अवैध कोयला लिंकेज के जरिए मोटा मुनाफा कमाया जाता है। जब छापा पड़ता है तो फर्म का ऑफिस या दस्तावेज कुछ नहीं मिलता, और असली माफिया बच निकलता है।

 

मंडी में आम समस्या

चंदासी कोयला मंडी में यह समस्या नई नहीं है। पिछले कई वर्षों से यहां फर्जी बिलिंग, बोगस फर्मों के सहारे कोयला खरीद-बिक्री और टैक्स चोरी के मामले बार-बार सामने आते रहे हैं। मंडी में 600 से ज्यादा व्यापारी और हजारों मजदूर काम करते हैं। अवैध कारोबार के कारण न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि असली व्यापारियों और मजदूरों पर भी दबाव बढ़ रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में 17 महीनों में ही 205 करोड़ रुपये के अवैध कारोबार पकड़े जाने का जिक्र है, जबकि कई मामले अभी भी जांच के दायरे में हैं।

प्रशासन पर सवाल

स्थानीय स्तर पर बार-बार छापेमारी होने के बावजूद ठोस परिणाम न निकलने से सवाल उठ रहे हैं कि क्या माफिया का नेटवर्क इतना मजबूत है कि प्रशासनिक प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं? व्यापारियों और जीएसटी टीम के बीच कभी-कभी तनाव भी देखा गया है, जैसे ट्रकों के नंबर नोट करने पर विरोध प्रदर्शन।

यह मामला सिर्फ एक मंडी तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर कोयला क्षेत्र में चल रहे काले कारोबार की झलक दिखाता है। शासन को अब फर्जी फर्मों पर सख्त नजर रखने, डिजिटल ट्रैकिंग बढ़ाने और असली दोषियों तक पहुंचने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है, ताकि एशिया की इस सबसे बड़ी कोयला मंडी का नाम अवैध कारोबार के गढ़ की बजाय पारदर्शी व्यापार का केंद्र बने।

 

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