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TET की बाध्यता पर शिक्षकों का वार, वाराणसी में हजारों का जोरदार आंदोलन

ख़बर भारत डेस्क

वाराणसी। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले और RTE Act 2017 में टीचर्स की सेवा शर्तों व मान-सम्मान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, TET Mukti संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शिक्षकों का चरणबद्ध आंदोलन जारी है। 20 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में लगभग 15 अनुषंगिक संगठनों के प्रतिनिधियों और हजारों शिक्षक/शिक्षिकाओं ने भाग लिया।

वक्ताओं ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के कदम की सराहना की, लेकिन इसे “आधी-अधूरी तैयारी” करार दिया। शिक्षकों ने कहा कि याचिका में TET की समय सीमा बढ़ाने और इंटरमीडियट BTC, Urdu BTC, C.P.Ed./D.P.Ed. योग्यता धारी शिक्षकों को राहत देने की मांग शामिल नहीं है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट का निर्णय NCTE द्वारा दाखिल हलफनामे के RTE Act 2017 के आलोक में आया, जिसमें 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए कोई स्पष्ट छूट नहीं है।

 

 

शिक्षकों ने सर्वसम्मति से मांग रखी कि सरकार RTE Act 2017 में संशोधन कर 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET अनिवार्यता से मुक्त करे और पुनर्विचार याचिका में मजबूती से पैरवी करे। उन्होंने कहा कि 50-55 वर्ष की उम्र में TET पास करना न केवल असंगत बल्कि अव्यवहारिक है। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की पूर्व सेवा की सराहना करते हुए इस पहल का स्वागत किया।

ज्ञापन कार्यक्रम में चेत नारायण सिंह (पूर्व शिक्षक विधायक और राज्य अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश), प्रो. जगदीश नारायण सिंह दीक्षित (संयुक्त महामंत्री, संस्थापक सदस्य, National Educational Federation, उत्तर प्रदेश) और वीर बहादुर सिंह (पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के पूर्व फैकल्टी) की विशेष उपस्थिति रही। इसके अलावा हजारों शिक्षक और शिक्षिकाओं ने अपने हाथों में तख्तियाँ लेकर कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट तक का रूट तय किया और सरकार को ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान उपस्थित शिक्षकों में बिनोद कुमार उपाध्याय, सकलदेव सिंह, डॉ. शैलेन्द्र विक्रम सिंह, रविंद्र नाथ यादव, आनंद कुमार सिंह, रविंद्र कुमार सिंह, अमिताभ मिश्रा, रामा यादव, विनोद कुमार सिंह, यशोवर्धन त्रिपाठी, अमृता सिंह, अर्चना सिंह, सुरेश कुमार सिंह, राजीव कुमार सिंह, संजय गुप्ता, एहतेशामुल हक, जितेंद्र कुमार सिंह, डॉ. राजेश्वर सिंह, चन्द्र प्रकाश गुप्ता, बी एन यादव, डॉ. मनीष कुमार कुशवाहा, शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय, राकेश चन्द्र पाठक महाकाल, संतोष कुमार सिंह, दिनेश कुमार सिंह, प्रीति शुक्ला, राजेश कुमार सिंह, कुमारी प्रतिमा, शिवजतन यादव, सुदर्शन, आरती गौतम, क्षितिज कुमार दीक्षित, सत्यनारायण वर्मा, बाबूलाल, हिमांशु कुमार श्रीवास्तव, आनंद प्रकाश रस्तोगी, अमित कुमार सिंह, श्याम बिहारी, शशिकांत दुबे, संजय कुमार श्रीवास्तव, अजय कुमार श्रीवास्तव, संकल नारायण सिंह, सुनीता, प्रशांत कुमार उपाध्याय, यशपाल यादव, श्रीनिवास सिंह, अशोक यादव, रामसागर, योगेश यादव, मोहन लाल, अखिलेश विश्वकर्मा, गिरीश चंद्र यादव, बसंत कुमार, प्रभात सिंहा, बृजेश कुमार यादव, अरविंद सिंह, रमेश यादव, ज्योति प्रकाश, वीरेंद्र सिंह, संगीता यादव, सुखपाल सिंह, डॉ. गोविन्द सिंह यादव और प्रमोद कुमार सिंह सहित अन्य हजारों शिक्षक शामिल रहे।

शिक्षकों ने अपने ज्ञापन में मांग रखी कि RTE Act 2017 को संशोधित किया जाए, शिक्षकों के मान-सम्मान का संरक्षण हो और विभाग का रवैया प्रयोगशाला जैसा न बने। उनका उद्देश्य केवल अपनी आवाज़ को सरकार तक पहुँचाना नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में TET की अनावश्यक अनिवार्यता को समाप्त करना है।

इस आंदोलन ने स्पष्ट संदेश दिया कि शिक्षक अपनी सेवा और अनुभव के सम्मान के लिए हमेशा खड़े रहेंगे और अव्यवहारिक नियमों को स्वीकार नहीं करेंगे।

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