Varanasi: मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल उतनी ही जरूरी जितनी शारीरिक स्वास्थ्य की — नीतू मिश्रा
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर आशा ट्रस्ट ने आयोजित किया संवाद कार्यक्रम

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी
वाराणसी, चौबेपुर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) की पूर्व संध्या पर आशा ट्रस्ट द्वारा भंदहा कला स्थित आशा लाइब्रेरी में छात्राओं के बीच एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और विशेषकर छात्राओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित ग्राम्यांचल महिला महाविद्यालय की मनोविज्ञान विभाग की प्रवक्ता एवं मनोविशेषज्ञ नीतू मिश्रा ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि — “मानसिक स्वास्थ्य देखभाल शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति के भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण से जुड़ा हुआ है। यदि मन स्वस्थ रहेगा तो शरीर और विचार दोनों ही सकारात्मक बने रहेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएँ सामान्य होती जा रही हैं, लेकिन इनका समय पर समाधान और जागरूकता बेहद आवश्यक है।
“स्व-देखभाल, संतुलित जीवनशैली, पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं,” — उन्होंने कहा।
मिश्रा ने छात्राओं को समझाया कि मनोवैज्ञानिक समस्याओं से शर्माने या छिपाने के बजाय खुलकर बात करनी चाहिए। यदि मन में कोई चिंता या परेशानी हो तो मनोविशेषज्ञ की सलाह लेना कमजोरी नहीं बल्कि समझदारी की निशानी है।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने भी अपने अनुभव साझा किए और मानसिक दबाव, पारिवारिक तनाव, परीक्षा से जुड़ी चिंता और सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे।
इस मौके पर आशा ट्रस्ट के समन्वयक वल्लभाचार्य पांडेय ने कहा — “आज विद्यार्थियों पर सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक दबाव बढ़ते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना बहुत जरूरी है। जब तक हम मन की बातों को दबाते रहेंगे, तब तक समस्याएँ बढ़ती रहेंगी। ऐसे संवाद ही समाधान की दिशा में पहला कदम हैं।”
उन्होंने बताया कि आशा ट्रस्ट समय-समय पर युवाओं और महिलाओं के बीच ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर किया जा सके।
कार्यशाला के सफल संचालन में सौरभ चंद्र, प्रदीप सिंह, ज्योति सिंह, साधना पांडेय, सरोज सिंह और विवेक द्विवेदी का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम में उपस्थित छात्राओं ने कहा कि उन्हें पहली बार किसी ने मानसिक स्वास्थ्य पर इतनी खुली चर्चा करने का अवसर दिया। उन्होंने इस पहल के लिए आशा ट्रस्ट और आयोजकों का धन्यवाद किया।
“मन की सेहत ही जीवन की सच्ची पूंजी है, इसे नजरअंदाज न करें।” — इस संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।




