Varanasi: 2 हजार करोड़ के कफ सीरप तस्करी मामले में बड़ी कार्रवाई, 6 शराब दुकानें सील
आरिफ़ अंसारी, वाराणसी

वाराणसी। वाराणसी में दो हजार करोड़ रुपये के कोडीन आधारित कफ सीरप तस्करी के बड़े मामले में आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने सोमवार को छह शराब की दुकानों को सील कर दिया। इन दुकानों से अगले आदेश तक शराब की बिक्री पूरी तरह बंद रहेगी।
आरोप है कि इन शराब दुकानों से होने वाली कमाई का एक निर्धारित हिस्सा हवाला के जरिए दुबई में फरार कफ सीरप तस्करी के सरगना शुभम जायसवाल तक पहुंचाया जा रहा था। इस हवाला नेटवर्क में शुभम के करीबी वैभव जायसवाल की भूमिका बताई जा रही है।
जिला आबकारी अधिकारी कमल कांत शर्मा और सहायक पुलिस आयुक्त विजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में पुलिस-आबकारी टीम ने सोमवार को छह कंपोजिट शॉप्स पर छापा मारा और उन्हें सील कर दिया। सील की गई दुकानें निम्नलिखित हैं:
– लहरतारा में शिवांगी जायसवाल (वैभव जायसवाल की पत्नी) की कंपोजिट शॉप
– शाहाबाद में रेखा देवी (कायस्थ टोला राजघाट) की कंपोजिट शॉप
– परेड कोठी में बबिता सिंह (कायस्थ टोला राजघाट) की कंपोजिट शॉप
– माधोपुर में वैशाली जायसवाल (शुभम जायसवाल की पत्नी) की कंपोजिट शॉप
– कज्जाकपुरा में ऊषा देवी (भारद्वाजी टोला राजघाट) की कंपोजिट शॉप
– खोजवां में राधिका जायसवाल (दारानगर) की कंपोजिट शॉप
बीते मंगलवार को कोतवाली पुलिस ने इनमें से पांच महिला लाइसेंसियों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें देर रात अदालत ने जमानत पर छोड़ दिया। पुलिस के अनुसार, रेखा देवी और वैशाली जायसवाल की अंग्रेजी शराब की दुकानों का लाइसेंस नवीनीकरण नहीं हुआ था।
सभी लाइसेंसियों से शपथपत्र लिया जाता है कि यदि उनके किसी माफिया या संगठित अपराध में संलिप्तता पाई गई तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिवांगी जायसवाल, बबिता सिंह, ऊषा देवी और राधिका जायसवाल को ७ दिन का नोटिस जारी किया गया है। उन्हें साबित करना होगा कि उनका कफ सीरप तस्करी माफिया या शुभम जायसवाल से कोई संबंध नहीं है। नोटिस की समयावधि पूरी होने के बाद उनके जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यह कार्रवाई कफ सीरप तस्करी मामले में पुलिस-आबकारी विभाग की लगातार बढ़ती सख्ती को दर्शाती है, जिसमें शुभम जायसवाल को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है और उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी चल रही है। अब देखना होगा कि सात दिन के नोटिस के बाद इन दुकानों और लाइसेंसियों पर क्या अंतिम फैसला लिया जाता है।




