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ऑपरेशन चक्रव्यूह में वाराणसी पुलिस की बड़ी सफलता — अंतरजनपदीय वाहन चोर 7 चोरी की बाइक के साथ गिरफ्तार

सीसीटीवी और मुखबिर की सूचना से खुला राज, चंदौली निवासी आरोपी पर कई जिलों में दर्ज हैं मुकदमे

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी

 

वाराणसी। अपराधियों पर नकेल कसने के लिए चलाए जा रहे “ऑपरेशन चक्रव्यूह” के तहत वाराणसी पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। कैंट थाना पुलिस ने एक अंतरजनपदीय शातिर वाहन चोर को गिरफ्तार किया है, जिसके कब्जे से 7 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। आरोपी कई जिलों में सक्रिय वाहन चोरी गिरोह का सदस्य बताया जा रहा है।

मुखबिर और सीसीटीवी की मदद से मिली सफलता

पुलिस आयुक्त के निर्देश पर चलाए जा रहे अपराध नियंत्रण अभियान के दौरान कैंट थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि एक युवक चोरी की बाइक लेकर छोटी कटिंग मैदान के पास आने वाला है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके में घेराबंदी की और देर रात 9:25 बजे अभियुक्त को धर दबोचा।

जांच के दौरान आरोपी के पास से 7 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद हुईं। पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो कई जगहों पर वही युवक बाइक चोरी करते हुए देखा गया।

गिरफ्तार आरोपी का आपराधिक इतिहास लंबा

गिरफ्तार आरोपी की पहचान रामप्रवेश यादव पुत्र रामअवतार, निवासी ग्राम रोहाखी, थाना इलिया, जनपद चंदौली (उम्र 25 वर्ष) के रूप में हुई। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी के खिलाफ वाराणसी और चंदौली में चोरी, लूट और अन्य धाराओं में सात से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

पुलिस के अनुसार, आरोपी एक संगठित वाहन चोरी गिरोह का सदस्य है, जो वाराणसी, चंदौली और आसपास के जिलों में मोटरसाइकिलें चोरी कर उन्हें सस्ते दामों में बेच देता था।

पुलिस टीम ने दिखाई मुस्तैदी

अभियान के तहत यह कार्रवाई डीसीपी वरुणा जोन, एडिशनल डीसीपी वरुणा जोन तथा एसीपी नितिन तनेजा (कैंट सर्किल) के पर्यवेक्षण में की गई।

गिरफ्तारी टीम में प्रभारी निरीक्षक शिवाकान्त मिश्रा, उप निरीक्षक अभिषेक सिंह, उप निरीक्षक प्रवेश कुतल, म०उ०नि० दीक्षा पांडेय (चौकी प्रभारी फुलवरिया), कांस्टेबल नागेन्द्र कुमार और प्रिंस तिवारी शामिल रहे।

पुलिस ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और चोरी के नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

वाहन चोरी नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद

पुलिस सूत्रों के अनुसार, रामप्रवेश यादव कई जिलों में सक्रिय वाहन चोरी गिरोह के लिए काम करता था। ये लोग शहर के व्यस्त इलाकों, बाजारों और धार्मिक स्थलों के पास खड़ी मोटरसाइकिलों को निशाना बनाते थे। चोरी के बाद वाहनों को फर्जी नंबर प्लेट लगाकर या पार्ट्स में तोड़कर सस्ते दामों पर बेच दिया जाता था।

 

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