चकिया तहसीलदार देवेंद्र यादव की मानवीय पहल: बाढ़ पीड़ित गरीब बच्चों संग मनाई दिवाली, वितरित किए उपहार
आकाश पाण्डेय, ख़बर भारत

~ तहसीलदार देवेंद्र यादव ने चकिया तहसील के उतरौत, सिकटिया और आसपास के बाढ़ग्रस्त गांवों में पहुंचकर अति गरीब परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की।
~ उन्होंने गरीब बच्चों और परिवारों को मिठाइयां, नए कपड़े और पटाखे (फुलझड़ियां सहित) वितरित किए, जो दीपावली की खुशियां साझा करने का माध्यम बने।
~ शाम को इलाके के सभी छोटे बच्चों के साथ मिठाइयां बांटीं और पटाखे जलाकर पूरे त्योहार को उनके साथ बिताया
तहसीलदार देवेंद्र यादव कहा कि उनका क्षेत्र के गरीबों के प्रति समर्पण है, और प्रशासन मुश्किल वक्त में हमेशा साथ खड़ा रहेगा
~ ग्रामीणों ने तहसीलदार को धन्यवाद दिया, उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलके और भगवान से तरक्की की कामना की।
~ इस पहल से चंदौली जिले में उत्साह फैला और पूरे प्रदेश में अन्य अधिकारियों के लिए प्रेरणा बना।
~ बाढ़ से क्षतिग्रस्त घरों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ दिलाने और राहत कार्य तेज करने का आश्वासन

चंदौली, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के चकिया तहसील में तहसीलदार श्री देवेंद्र यादव ने दीपावली के पावन पर्व पर एक सराहनीय और हृदयस्पर्शी कार्य किया। बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले अति गरीब और पिछड़े परिवारों के बीच पहुंचकर उन्होंने न केवल मिठाइयां, कपड़े और पटाखे वितरित किए, बल्कि पूरे त्योहार को इन जरूरतमंद बच्चों के साथ मनाया। यह पहल जिला मजिस्ट्रेट चंद्रमोहन गर्ग के निर्देश पर की गई, जिसने बाढ़ पीड़ितों के चेहरों पर लंबे समय बाद मुस्कान बिखेर दी। ग्रामीणों ने तहसीलदार के इस मानवीय कार्य की खूब सराहना की और आंसुओं के साथ धन्यवाद दिया।


यह कहानी चकिया तहसील के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों जैसे उतरौत, सिकटिया और पीडीडीयू नगर के आसपास के गांवों की है जहाँ हाल ही में आई बाढ़ ने इन इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया था, जहां सैकड़ों परिवारों के घर-दबाव उजड़ गए, फसलें नष्ट हो गईं और रोजमर्रा की जिंदगी पटरी से उतर गई। ऐसे में दीपावली का त्योहार इन परिवारों के लिए उदासी भरा होने वाला था, लेकिन तहसीलदार देवेंद्र यादव की यह पहल ने सब कुछ बदल दिया। उन्होंने सुबह से ही इन परिवारों का दौरा शुरू किया, उनकी समस्याएं सुनीं और जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।

तहसीलदार ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल राहत सामग्री बांटना नहीं, बल्कि पीड़ितों के दिलों तक खुशियां पहुंचाना है। उन्होंने कहा,
“मेरे क्षेत्र में जहां भी अत्यंत गरीब परिवार हैं, उनके लिए मैं हमेशा खड़ा रहूंगा। दीपावली का त्योहार तो सबके लिए खुशियों का संदेश लाता है, लेकिन जो सबसे ज्यादा जरूरतमंद हैं, उनके साथ इसे साझा करना ही सच्ची सेवा है।”

इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से बच्चों पर ध्यान केंद्रित किया, जो बाढ़ की मार झेलने के बाद भी त्योहार की चमक से वंचित थे। शाम होते-होते पूरा इलाका बच्चों की हंसी-खुशी से गूंज उठा।


ग्रामीणों का कहना है कि तहसीलदार का यह कार्य न केवल उनकी आर्थिक मदद करेगा, बल्कि मनोबल बढ़ाने का काम भी करेगा। एक बुजुर्ग महिला ने भावुक होकर कहा, “भगवान आपको और तरक्की दें। आपके जैसे अधिकारी होने से ही सरकार का असली चेहरा नजर आता है।” इस पहल से न केवल चकिया तहसील, बल्कि पूरे चंदौली जिले में सकारात्मक संदेश फैल गया है। कई ग्रामीणों ने इसे प्रदेश स्तर पर अन्य अधिकारियों के लिए अनुकरणीय बताया। जिला प्रशासन ने भी इस प्रयास की सराहना की है और इसे बाढ़ राहत के व्यापक अभियान का हिस्सा बनाया है।

इस घटना ने साबित कर दिया कि प्रशासन केवल कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि जनता के दुख-सुख में साझीदार भी हो सकता है। आने वाले दिनों में ऐसी और पहलों की उम्मीद की जा रही है, ताकि बाढ़ पीड़ित परिवार जल्द ही सामान्य जीवन की राह पर लौट सकें।





