पुलिस और डॉक्टरों की संवेदनहीनता ने ले ली एक युवक की जान: सड़क पर तड़पता रहा घायल युवक, पुलिस और डॉक्टर बने तमाशबीन
Khabar Chandauli: चंदौली में सड़क हादसे के घायल युवक की मदद में देरी, डायल 112 और डॉक्टरों की संवेदनहीनता से इलाज में देरी बनी मौत की वजह

रंधा सिंह, चन्दौली
चंदौली। मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र में गुरुवार की शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पुलिस और चिकित्सा तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया। वाराणसी से लौटते वक्त सड़क दुर्घटना में घायल हुआ 20 वर्षीय करण यादव, करीब आधे घंटे तक सड़क किनारे तड़पता रहा, लेकिन न पुलिस ने समय पर अस्पताल पहुँचाया और न ही डॉक्टरों ने फौरन इलाज शुरू किया। नतीजा — घायल युवक की मौके पर ही सांसें थम गईं।
पीआरवी टीम (डायल 112) मौके पर पहुंची, तड़पता रहा युवक पर एंबुलेंस का करती रही इंतज़ार
मुगलसराय के दुलहीपुर एफसीआई गोदाम के पास गुरुवार शाम एक बाइक सवार युवक हादसे का शिकार हो गया। स्थानीय युवक आशीष चौहान ने डायल 112 पर कॉल किया तो पुलिस की पीआरवी टीम मौके पर पहुंच गई।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि सरकारी वाहन होने के बावजूद पुलिसकर्मी घायल को उठाने या अस्पताल ले जाने से हिचकते रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिसकर्मी सड़क किनारे खड़े होकर प्राइवेट वाहन रुकवाने की कोशिश करते रहे, जबकि घायल युवक कराहता रहा।
आधे घंटे की देरी में थम गई सांस
लगभग 30 मिनट बाद एक टोटो से किसी तरह घायल युवक को राजकीय महिला चिकित्सालय, मुगलसराय भेजा गया। लेकिन वहां भी संवेदनहीनता की कहानी जारी रही। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर और कर्मचारी पुलिस का इंतजार करने लगे, जिससे उपचार शुरू करने में और देर हो गई। आख़िरकार जब तक युवक को इमरजेंसी कक्ष में ले जाया गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
अस्पताल में भी संवेदनहीनता की हद — स्ट्रेचर तक नहीं दिया गया
घायल को अस्पताल के भीतर ले जाने के लिए कोई कर्मचारी सामने नहीं आया। युवक के साथ आए आशीष ने जब स्ट्रेचर मांगा तो अस्पतालकर्मियों ने उसे डांटकर भगा दिया। आशीष ने बाहर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मी को स्थिति बताई, जिसके दखल के बाद घायल को अंदर ले जाया गया। पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
परिजनों में आक्रोश, जांच के आदेश
मृतक करण यादव पुत्र संजय यादव, निवासी लोहरा मारुति नगर (मुगलसराय) का परिवार घटना के बाद सदमे में है।
परिजनों ने पुलिस और चिकित्साकर्मियों की लापरवाही को युवक की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
इस मामले पर चंदौली के पुलिस अधीक्षक आदित्य लांघे ने कहा कि घटना गंभीर है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
सिस्टम पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है —
क्या हमारी पुलिस और चिकित्सा व्यवस्था में मानवता की जगह प्रक्रिया ने ले ली है? एक घायल युवक की जान बचाई जा सकती थी, अगर संवेदनशीलता दिखाई जाती। लेकिन अफसोस, लापरवाही और इंतजार ने एक मासूम जान छीन ली।




