सपा का अल्टीमेटम: शहर से बाहर हों शराब के ठेके, बार और आलीशान मांसाहारी होटल
छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई और बड़े कारोबारियों को छूट क्यों? जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन, निष्पक्ष नीति की उठी मांग, मांग पूरी नही होने पर होगा आंदोलन

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी
~ वाराणसी नगर निगम ने शहर क्षेत्र से बाहर मांस-मछली की दुकान करने का किय्या एलान
~ नियम सभी के लिए एक समान हों, गरीबों पर ही कार्रवाई क्यों?
~ सपा ने उठाए निष्पक्ष कार्रवाई पर सवाल, प्रशासन को दी आंदोलन की चेतावनी
~ शहर की स्वच्छता के नाम पर दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं: समाजवादी पार्टी
वाराणसी, 9 जून 2026। बनारस में मांस विक्रेताओं और सड़क किनारे कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों के खिलाफ चल रही प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। समाजवादी पार्टी ने प्रशासन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि स्वच्छता, सुरक्षा और नैतिक वातावरण के नाम पर कार्रवाई की जा रही है तो उसका पैमाना सभी के लिए समान होना चाहिए। इसी मांग को लेकर मंगलवार को समाजवादी पार्टी के नेताओं, अधिवक्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी वाराणसी सतेन्द्र कुमार को ज्ञापन सौंपकर शहर के भीतर संचालित शराब के ठेकों, बार और बड़े मांसाहारी होटलों को भी नगर सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे समाजवादी नेता जीशान अंसारी ने कहा कि यदि प्रशासन और नगर निगम वास्तव में शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाना चाहते हैं तो केवल गरीब और छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर के प्रमुख इलाकों में संचालित शराब के ठेके और बार सामाजिक वातावरण को प्रभावित कर रहे हैं और इनके कारण कई स्थानों पर असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में इन प्रतिष्ठानों को भी शहर से बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

सपा नेताओं का कहना है कि वर्तमान कार्रवाई से ऐसा संदेश जा रहा है कि रोजी-रोटी कमाने वाले छोटे दुकानदारों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि बड़े कारोबारी और प्रभावशाली वर्ग कार्रवाई के दायरे से बाहर हैं। सपा नेता शुभम सेठ “गोलू” ने सवाल उठाया कि यदि मांस की छोटी दुकानों को शहर से बाहर भेजने की बात हो रही है तो बड़े-बड़े मांसाहारी होटल और रेस्टोरेंट इस दायरे से बाहर क्यों हैं। उन्होंने कहा कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और किसी को विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए।

वहीं सपा नेता शिवेंद्र राय ने कहा कि शहर के बीच स्थित कई शराब के ठेके और बार कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि देर रात तक होने वाली गतिविधियों से स्थानीय नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसलिए प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
ज्ञापन के दौरान अधिवक्ता आलोक सौरभ और अधिवक्ता अभिषेक झा ने भी प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि स्वच्छता और सुव्यवस्था के नाम पर कार्रवाई हो रही है तो उसका लाभ और प्रभाव सभी वर्गों पर समान रूप से दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई और बड़े प्रतिष्ठानों को छूट दिए जाने से भेदभाव की भावना पैदा होती है।

कार्यक्रम के अंत में संयोजक आनंद यादव ने प्रशासन से शीघ्र निर्णय लेने की मांग करते हुए कहा कि जनता इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो समाजवादी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान अधिवक्ता अमरेंद्र पांडेय, पुनीत मौर्य, अमित कुमार “विक्की”, राज श्रीवास्तव, कैफ अहमद, रितेश गुप्ता, धीरू चौबे, सोनू सोनकर, फरहान सिद्दीकी, आरिफ खान समेत कई कार्यकर्ता और नागरिक मौजूद रहे।




