पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर मंथन, युवाओं को राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरित किया गया
आईजीएनसीए वाराणसी में आयोजित हुई पुस्तक परिचर्चा, ‘समर्पण’ के माध्यम से व्यक्तित्व और कृतित्व पर हुई चर्चा

धनेश्वर साहनी, संवाददाता
वाराणसी। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) क्षेत्रीय केन्द्र, वाराणसी की ओर से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, विचारों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर केंद्रित पुस्तक ‘समर्पणः दीनदयाल उपाध्याय’ पर विशेष परिचर्चा एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में युवा पीढ़ी को उनके जीवन-दर्शन और राष्ट्रहित में किए गए कार्यों से परिचित कराने पर विशेष जोर दिया गया।
लेखक ने साझा किए पुस्तक लेखन के अनुभव
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं पुस्तक के लेखक चंदन कुमार ने पुस्तक की पृष्ठभूमि और लेखन यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पुस्तक केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों और उनके राष्ट्रवादी चिंतन को समझने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि पुस्तक का नाम ‘समर्पण’ व्यक्ति के उच्च उद्देश्यों, समाज और राष्ट्र के प्रति निष्ठा एवं समर्पित भाव को अभिव्यक्त करता है। उनके अनुसार दीनदयाल उपाध्याय का पूरा जीवन इसी भावना का जीवंत उदाहरण रहा।
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एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिकता पर दिया जोर
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक एवं प्रज्ञा प्रवाह की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रामाशीष सिंह सारस्वत ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय चिंतन को आगे बढ़ाने में प्रज्ञा प्रवाह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने युवाओं से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन का अध्ययन करने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान में उनके विचार आज भी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं।
भारतीय संस्कृति से जुड़ाव ही विकास का आधार
वैदिक विद्वान एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेषज्ञ विद्याप्रसाद मिश्र ने अपने वक्तव्य में भारतीय संस्कृति, परंपरा और दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन के अंतर्संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर ही समाज और राष्ट्र का संतुलित एवं समग्र विकास संभव है।
युवाओं और बुद्धिजीवियों ने रखा अपना पक्ष
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, शिक्षाविद, साहित्यप्रेमी और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने पुस्तक से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए और वक्ताओं के साथ संवाद कर दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को समझने का प्रयास किया। चर्चा के दौरान राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना, भारतीय ज्ञान परंपरा और सामाजिक दायित्व जैसे विषय प्रमुखता से उभरे।
विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण की भावना को जीवन में उतारने तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का संकल्प लिया। आयोजन को प्रतिभागियों ने वैचारिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।




