चोलापुर के नेहिया गांव में नीले और केसरिया झंडे को लेकर उपद्रव: पथराव में एसीपी विदुष सक्सेना सहित कई जवान घायल, भारी पुलिस बल तैनात
नीरज सिंह, वाराणसी

वाराणसी के चोलापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नेहिया गांव में बाबा बटुक भैरवनाथ मंदिर के मुख्य द्वार पर डॉ. भीमराव आंबेडकर से संबंधित झंडा लगाए जाने को लेकर दो दिनों से चला आ रहा विवाद शुक्रवार को हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क जाम करने और पुलिस पर पथराव करने से स्थिति बिगड़ गई, जिसमें सारनाथ जोन के एसीपी विदुष सक्सेना गंभीर रूप से घायल हो गए। पत्थर उनकी आंख के पास लगा, लेकिन आंख बच गई, जिससे बड़े हादसे से बचाव हुआ।
घटना की शुरुआत आंबेडकर जयंती के मौके पर हुई थी। दलित समाज के लोगों ने जुलूस के दौरान मंदिर के गेट पर बाबा साहेब आंबेडकर का झंडा लगाया। गुरुवार सुबह जब झंडा गायब मिला, तो स्थानीय दलित समाज के लोग भड़क उठे। उन्होंने गांव के सामने बाबतपुर-चौबेपुर मार्ग को बांस की बल्लियों और अन्य सामान से जाम कर दिया और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने झंडा हटाने को आंबेडकर के अपमान से जोड़ते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। तनाव को देखते हुए पुलिस ने झंडा दोबारा लगवाकर लोगों को शांत करने का प्रयास किया। हालांकि, इस दौरान दूसरे पक्ष यानी हिंदू संगठनों और अन्य समाज के लोगों को सूचना मिल गई। वे भी बड़ी संख्या में पहुंच गए और झंडा लगाए जाने का कड़ा विरोध करने लगे। बढ़ते विवाद को देखते हुए पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर बातचीत कराई। आपसी सहमति से रामनवमी के अवसर पर पहले से लगे केसरिया ध्वज को पुनः स्थापित करने का फैसला लिया गया और झंडा हटा लिया गया।
शुक्रवार को मामला फिर भड़क उठा। दलित समाज के सैकड़ों लोग दोबारा सड़क पर उतर आए। उन्होंने मार्ग को जाम कर प्रदर्शन किया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति उग्र होते ही भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। इस हमले में एसीपी विदुष सक्सेना को चोट लगी। स्थानीय पुलिसकर्मी भी घायल हुए। गनीमत रही कि पत्थर आंख में नहीं लगा, वरना स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

पुलिस ने तुरंत अतिरिक्त फोर्स बुलाकर स्थिति को काबू में किया। चोलापुर थाने के अलावा आसपास के कई थानों की पुलिस टीम और पीएसी की टुकड़ियां मौके पर तैनात कर दी गईं। वरिष्ठ अधिकारियों ने लगातार निगरानी रखी और दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति है, लेकिन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यातायात प्रभावित रहा, जिससे आसपास के इलाकों में परेशानी हुई।
प्रशासन ने दोनों पक्षों से संवाद जारी रखा है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि झंडे को लेकर कोई भी एकतरफा कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि दोनों समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखकर फैसला लिया गया। हालांकि, दलित समाज के लोग झंडा हटाने और कथित अपमान को लेकर अभी भी नाराज हैं।
यह घटना वाराणसी जैसे संवेदनशील इलाके में सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की चुनौती को फिर उजागर करती है। स्थानीय लोग शांति की अपील कर रहे हैं, जबकि पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। स्थिति पर अभी नजर रखी जा रही है और आगे की अपडेट के लिए प्रशासन सतर्क है।



