महाघोटाला: पूर्वांचल में ‘चिटफंड’ के नाम पर अरबों की लूट; फर्जी कागजी कंपनी खोल डकारे जनता के पैसे, पुलिस के सामने हुए समझौते को ठगों ने बनाया मजाक!
धानापुर, बबुरी और चहनिया समेत कई जिलों में शाखाएं खोल करोड़ों बटोर कर मास्टरमाइंड फरार; अब पीड़ितों को मिल रही जान से मारने की धमकी!

विशेष रिपोर्ट: खबर भारत
वाराणसी/चंदौली: उत्तर प्रदेश के चंदौली और वाराणसी जिलों में ‘रॉयल प्राप्टेक प्राइवेट लिमिटेड’ एवं ‘कॉप्स कॉरपोरेशन LLP’ द्वारा फैलाया गया ठगी का मायाजाल अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। फर्जी कागजी कंपनियां खड़ी कर और चिटफंड के नाम पर अरबों रुपए का गबन करने वाले ये रसूखदार आज भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं। प्रार्थी राजेश कुमार सहित सैकड़ों निवेशक न्याय के लिए सालों से भटक रहे हैं, जबकि आरोपी खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं।
सुनियोजित लूट: फर्जी शाखाओं के जाल में फंसा पूर्वांचल
आरोपियों ने जनता और स्थानीय एजेंटों को गुमराह करने के लिए चंदौली, धानापुर, बबुरी, गाजीपुर, जौनपुर, हिन्नौती और चहनिया जैसे क्षेत्रों में अपनी भव्य शाखाएं खोली थीं। इन दफ्तरों के जरिए करोड़ों रुपए जमा कराने के बाद, रातों-रात दफ्तरों को बंद कर दिया गया और वहां कार्यरत सभी कर्मचारी फरार हो गए। यह पूरी तरह से एक ‘पूंजी हड़पो और भागो’ (Ponzi Scheme) की साजिश थी, जिसमें असली मास्टरमाइंड वाराणसी और गाजीपुर में सुरक्षित बैठे हैं।
वर्दी का अपमान: थाने में हुआ ‘मौखिक समझौता’ बना रसूखदारों का खिलौना
सबसे गंभीर मामला 16 अक्टूबर 2024 का है, जब बलुआ थाना परिसर में तत्कालीन थाना प्रभारी (SHO) अशोक मिश्रा एवं चौकी प्रभारी तरुण पाण्डेय की मौजूदगी में मौखिक समझौता कराया गया था। पुलिस अधिकारियों के सामने आरोपियों ने किश्तों में भुगतान का वादा किया था। लेकिन आज स्थिति यह है कि आरोपी सरेआम घूम रहे हैं और पीड़ितों को धमका रहे हैं कि “कानून हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता”। पुलिस की मौजूदगी में हुए वादे की यह अवहेलना खाकी के इकबाल को सीधी चुनौती है।
ये हैं वो नामजद चेहरे, जिनसे कांप रहा है सिस्टम?
प्रार्थी द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, इन चार लोगों को इस कथित घोटाले का मुख्य सूत्रधार बताया गया है:
1. हरिश्चंद्र राय (डायरेक्टर): पुत्र अनिल कुमार राय, निवासी- शांति कुंज, सिगरा, वाराणसी।
2. पंकज गुप्ता (CA): पुत्र ओम प्रकाश गुप्ता, निवासी- ग्राम रामगंज नौरंगाबाद, गाजीपुर।
3. शुक्लाचार्य गोंड (सीनियर सलाहकार): पुत्र संकठा प्रसाद, निवासी- ग्राम उतड़ी, चंदौली।
4. जगदीश गुप्ता (एरिया मैनेजर): पुत्र भुआल साव गुप्ता, निवासी- ग्राम टांडा कलां, चंदौली।
प्रशासनिक सुस्ती: SP, कमिश्नर और CM हेल्पलाइन भी बेअसर?
पीड़ित ने न्याय के लिए पुलिस अधीक्षक (SP) चंदौली और मंडलायुक्त (कमिश्नर) वाराणसी को कई बार शिकायती पत्र सौंपे और CM हेल्पलाइन पर भी कई बार शिकायत की गई, लेकिन पिछले कई सालों से जांच के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। इस प्रशासनिक सुस्ती ने ठगों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि वे अब पीड़ितों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न कर रहे हैं।
निष्कर्ष: अरबों का गबन कर दफ्तर बंद कर भागने वाले इन रसूखदारों पर अब तक सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन इन ‘चिटफंड’ माफियाओं की संपत्ति कुर्क करने की हिम्मत दिखाएगा?




