वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने किया तीन प्रमुख तालाबों का निरीक्षण, पुनरुत्थान कार्यों को मिली गति
कर्दमेश्वर, कंदवा व कंचनपुर तालाबों का पारिस्थितिक पुनर्जन्म शुरू, उपाध्यक्ष ने किया स्थलीय निरीक्षण

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी
वाराणसी। वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी “तालाबों का पारिस्थितिक पुनरुत्थान एवं सौंदर्यीकरण परियोजना” के अंतर्गत आज उपाध्यक्ष श्री पूर्ण बोरा ने शहर के तीन प्रमुख तालाबों – कर्दमेश्वर महादेव मंदिर के अपस्ट्रीम स्थित तालाब, कंदवा तालाब तथा कंचनपुर तालाब – का गहन स्थलीय निरीक्षण किया। यह परियोजना जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण तथा शहरी पर्यावरण सुंदरीकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष महोदय ने संबंधित अभियंताओं एवं अधिकारियों के साथ मिलकर प्रस्तावित कार्यों की तकनीकी व्यवहार्यता, स्थल की प्राकृतिक संरचना तथा भावी विकास की संभावनाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य पूरी तरह नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस के सिद्धांतों पर आधारित हों, ताकि तालाब अपने मूल प्राकृतिक स्वरूप में पुनर्जनम प्राप्त कर सकें। विशेष रूप से स्थानीय जल-धाराओं, भू-जल रिचार्ज क्षेत्रों तथा जैव विविधता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण किए गए तालाबों का अनुमानित क्षेत्रफल
– कर्दमेश्वर महादेव मंदिर अपस्ट्रीम तालाब : 3,000–3,500 वर्गमीटर
– कंदवा तालाब : 2,500–3,000 वर्गमीटर
– कंचनपुर तालाब : 2,000–2,500 वर्गमीटर
उपाध्यक्ष ने प्रारंभिक कार्यों जैसे डिसिल्टिंग, डी-वीडिंग, तलछट निष्कासन, कचरा हटाना तथा जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करना समयबद्ध रूप से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए ताकि तालाबों की जल-धारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके। साथ ही कैचमेंट क्षेत्र में अनियंत्रित जल प्रवाह एवं बाहरी प्रदूषण को रोकने हेतु वैज्ञानिक सर्वे तथा आवश्यक संरचनात्मक हस्तक्षेप करने को कहा।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ
– डिसिल्टिंग, डी-वीडिंग एवं सिल्ट ट्रैप का निर्माण
– नालों से आने वाले प्रदूषकों को रोकने के लिए प्राकृतिक फ़िल्टर बेड एवं फ्लोटिंग वेटलैंड्स
– इन-सीटू जल उपचार तकनीकों से जल गुणवत्ता में सुधार
– भू-जल रिचार्ज एवं प्राकृतिक जलधाराओं से कनेक्टिविटी को मजबूत करना
– हार्डस्केप–सॉफ्टस्केप, वॉक-वे, लाइटिंग एवं जन-सुविधाओं का विकास
उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने कहा, “ये तालाब केवल जल संग्रहण के स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरणीय धड़कन हैं। परियोजना के पूर्ण होने पर ये तालाब न केवल पारिस्थितिक रूप से स्वस्थ होंगे, बल्कि नागरिकों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं आकर्षक सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होकर वाराणसी की प्राचीन जल-संस्कृति को पुनर्जीवित करेंगे।”
अंत में उन्होंने सभी अधिकारियों को उच्च गुणवत्ता, पूर्ण पारदर्शिता एवं निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश दिए।




