Varanasi

Varanasi: अमृताशा हॉस्पिटल की जांच में बड़ा खुलासा, मानचित्र से छेड़छाड़, पार्किंग गायब, NOC पर रोक

वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग की टीम ने पकड़ी गड़बड़ी, आयुष्मान भारत योजना के तहत नहीं मिलेगी मंजूरी

Neeraj Singh, Varanasi

 

~ अपर नगर मजिस्ट्रेट (प्रथम) के पत्र पर हुआ स्थलीय निरीक्षण
~ वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग की अगुवाई में टीम ने की जांच
~ अस्पताल ने स्वीकृत मानचित्र से अलग निर्माण किया
~ 66 में से केवल 32 पार्किंग मिलीं
~ एनओसी देने से वीडीए ने किया इनकार
~ आयुष्मान भारत योजना में अस्थायी रोक
~ सामाजिक संगठनों ने की पारदर्शिता की मांग

 

वाराणसी के शिवपुर स्थित अमृताशा हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर पर प्रशासनिक शिकंजा कस गया है। अपर नगर मजिस्ट्रेट (प्रथम) के निर्देश पर वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की टीम ने अस्पताल परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य यह था कि अस्पताल को आयुष्मान भारत योजना में शामिल करने हेतु एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) दिया जा सकता है या नहीं।

लेकिन जब वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग की अध्यक्षता में संयुक्त टीम मौके पर पहुंची, तो जो सच्चाई सामने आई, उसने अस्पताल प्रबंधन की पोल खोल दी। टीम ने पाया कि अस्पताल का निर्माण स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किया गया है।

वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग की अगुवाई में अमृताशा अस्पताल की जांच करते VDA के अधिकारी 

मानचित्र में 66 पार्किंग, बनी सिर्फ 32 — बाकी जगह पर अतिरिक्त निर्माण

निरीक्षण में पता चला कि स्वीकृत नक्शे में 66 कार पार्किंग और एक एम्बुलेंस पार्किंग का प्रावधान था, लेकिन मौके पर केवल 32 पार्किंग ही बनी मिलीं। शेष स्थान पर अस्पताल की अतिरिक्त बिल्डिंग और दीवारबंदी कर दी गई थी। टीम ने इसे स्पष्ट उल्लंघन करार देते हुए कहा कि यह सुरक्षा मानकों और भवन उपविधियों का गंभीर मामला है।

एनओसी देने से इंकार, आयुष्मान भारत योजना में रोक

वीडीए रिपोर्ट में कहा गया कि जब तक अस्पताल अपने निर्माण को स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप नहीं करता, तब तक उसे किसी भी प्रकार की एनओसी नहीं दी जा सकती। पार्किंग की कमी और नियम उल्लंघन के चलते आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अस्पताल का इंपैनलमेंट रोक दिया गया है।

 

बिना अनुपालन के कैसे चल रहा था अस्पताल, उठे सवाल

जांच रिपोर्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण मानकों का पालन नहीं हुआ, तो अस्पताल इतने वर्षों से संचालित कैसे हो रहा था?
क्या संबंधित विभागों की ओर से कभी सत्यापन नहीं किया गया, या फिर यह सब “मौन स्वीकृति” के तहत होता रहा?

स्थानीय लोगों ने बताया कि अस्पताल के कारण सड़क पर अक्सर जाम की स्थिति बनती है और एम्बुलेंस को अंदर घुसने में दिक्कत होती है। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

 

“नियमों से ऊपर कोई नहीं” — वीडीए का स्पष्ट संदेश

वीडीए की यह कार्रवाई प्रशासनिक सख्ती का उदाहरण बन गई है। प्राधिकरण ने साफ संदेश दिया है कि चाहे निजी अस्पताल हों या कोई अन्य संस्थान — जनहित और नियम सर्वोपरि हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल का पार्किंग क्षेत्र व्यावसायिक उपयोग में लाना न केवल अवैध है बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

सामाजिक संगठनों ने की सराहना

स्थानीय सामाजिक संस्थाओं ने वीडीए की कार्रवाई की सराहना की।दीक्षा महिला कल्याण शोध संस्थान की अध्यक्ष संतोषी शुक्ला ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा लाभ का माध्यम नहीं, सेवा का क्षेत्र है। “अगर कोई अस्पताल नियम तोड़ता है, तो कार्रवाई होनी ही चाहिए,” उन्होंने कहा।

 

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