विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में लगा वृहद स्वास्थ्य शिविर, 346 लोगों की हुई जांच, 53 को मिला मानसिक परामर्श
मानसिक स्वास्थ्य कोई शर्म नहीं, इलाज और समझदारी ही समाधान है।

~ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयुर्वेदिक कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन
~ 346 व्यक्तियों की हुई स्क्रीनिंग, 23 मानसिक रोगियों को मिला उपचार
~ मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी – सीएमओ
आरिफ़ अंसारी, वाराणसी
वाराणसी, 10 अक्टूबर 2025 — राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, चौकाघाट में शुक्रवार को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक वृहद मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संदीप चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में सीएमओ डॉ. चौधरी ने कहा कि आज मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर सामाजिक और चिकित्सीय चिंता का विषय बन चुका है। उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली, पारिवारिक तनाव, आर्थिक दबाव और सामाजिक प्रतिस्पर्धा के चलते मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों में निरंतर वृद्धि हो रही है। पुरुष, महिला, बच्चे या बुजुर्ग — कोई भी इससे अछूता नहीं है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता पैदा करना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर पहचान और इलाज से इन बीमारियों का सफल उपचार संभव है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस हर वर्ष 10 अक्टूबर को मनाया जाता है ताकि लोगों में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाई जा सके। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि “मानसिक रोग से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशील रहें, उन्हें समाज से अलग न करें। ऐसे मरीजों को दवा के साथ सहानुभूति और समर्थन की जरूरत होती है।” उन्होंने यह भी कहा कि मानसिक रोगों से ग्रस्त व्यक्ति को उपेक्षा के बजाय समझ और देखभाल की आवश्यकता होती है, क्योंकि उपेक्षा के कारण कई बार वे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
शिविर में चिकित्सकों की टीम ने कुल 346 लोगों की जांच की, जिनमें से 53 लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित परामर्श दिया गया, जबकि 23 मरीजों को मानसिक रोगों का उपचार प्रदान किया गया। इसके अलावा शिविर में तंबाकू नियंत्रण, क्षय रोग, मधुमेह, रक्तचाप, वृद्धजन स्वास्थ्य जांच, आयुष्मान भारत योजना, तथा अन्य सामान्य बीमारियों से संबंधित जांच और परामर्श सेवाएं भी दी गईं।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. नीलम गुप्ता ने कहा कि किशोरावस्था जीवन का एक संवेदनशील चरण होता है, जिसमें शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के परिवर्तन होते हैं। इस उम्र में यदि सही मार्गदर्शन और सहारा न मिले तो मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि “कई बार 14 से 18 वर्ष की उम्र के बीच बच्चे मानसिक बीमारी की चपेट में आ जाते हैं, लेकिन परिवार इसे नजरअंदाज कर देता है। हमें समय रहते इनके लक्षणों की पहचान कर इलाज शुरू करना चाहिए।”
मनोचिकित्सक डॉ. रविंद्र यादव ने कहा कि मानसिक बीमारी के लक्षणों की सही पहचान और उचित उपचार से रोगी पूरी तरह ठीक हो सकता है। लेकिन आज भी लोग अंधविश्वास, झाड़-फूंक और गलत धारणाओं के कारण इलाज नहीं कराते, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। उन्होंने कहा कि मानसिक रोग किसी व्यक्ति की “कमजोरी” नहीं बल्कि एक “स्वास्थ्य समस्या” है, जिसका इलाज संभव है।
इस दौरान सीएमओ डॉ. चौधरी ने स्वयं शिविर में प्रदान की जा रही चिकित्सा और परामर्श सेवाओं का निरीक्षण किया और चिकित्सकों की टीम को उनके प्रयासों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के शिविर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नियमित रूप से लगाए जाने चाहिए ताकि समाज के हर वर्ग तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें।
शिविर में प्रमुख रूप से डॉ. संजय कुमार पांडे, डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, डॉ. धनंजय कुमार सिंह, डॉ. वाई. डी. पाठक (डिप्टी सीएमओ), डॉ. सी. बी. आर्या, डॉ. कनक वर्मा, डॉ. कमल द्विवेदी, डॉ. नेहा, डॉ. सिद्धांत, मनोचिकित्सक डॉ. रामाश्रय सहित अन्य चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी और कॉलेज स्टाफ मौजूद रहे।
शिविर के आयोजन में आयुष विभाग, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय वाराणसी और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सहयोग से व्यापक स्तर पर जनजागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इस अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित पोस्टर प्रदर्शनी, काउंसलिंग सत्र और प्रश्नोत्तर कार्यक्रम भी हुआ, जिसमें विद्यार्थियों और मरीजों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।




