चंदौली में दलहन-तिलहन की खेती को बढ़ावा, किसानों को मुफ्त ‘गिरिराज’ सरसों बीज वितरित
कृषि विज्ञान केंद्र ने धानापुर में आयोजित किया जागरूकता कार्यक्रम, वैज्ञानिकों ने कम सिंचाई में अधिक मुनाफे के दिए टिप्स

चंदन सिंह, चंदौली
धानापुर (चंदौली)। जिले में दलहन और तिलहन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शनिवार को धानापुर स्थित शिवनंदन फॉर्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी (FPO) के किसान बाजार में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक धान-गेहूं की खेती से इतर दलहन और तिलहन जैसी नकदी फसलों के लिए प्रेरित करना था।
वैज्ञानिकों ने बताए कम पानी में खेती के लाभ
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि दलहन-तिलहन की फसलें कम सिंचाई में अच्छा उत्पादन देती हैं [6]. इससे न केवल जल संरक्षण होता है, बल्कि भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन पर भी रोक लगती है, जो भविष्य के लिए एक स्थायी समाधान है।
रोग नियंत्रण और मृदा स्वास्थ्य पर जोर
वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार सिंह ने इन फसलों में लगने वाले रोगों और खरपतवार के प्रभावी नियंत्रण के तरीकों पर विस्तृत जानकारी साझा की। वहीं, मृदा वैज्ञानिक डॉ. चंदन सिंह ने मिट्टी की जांच (मृदा परीक्षण) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने किसानों को KVK द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अन्य सुविधाओं के बारे में भी बताया, साथ ही हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
पशुपालन और जैविक खेती का एकीकरण
शिवनंदन FPO के निदेशक रमेश सिंह ने कृषि के साथ-साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पशुपालन से मिलने वाले गोबर और गोमूत्र का उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है।
किसानों को मिला उन्नत बीज का तोहफा
कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण किसानों को मुफ्त बीज का वितरण रहा। आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय, अयोध्या से प्राप्त सरसों की उन्नत प्रजाति ‘गिरिराज’ के बीज 50 प्रगतिशील किसानों को निःशुल्क वितरित किए गए।
कार्यक्रम का समापन FPO के निदेशक ओमप्रकाश सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित किसान, जिनमें दामोदर सिंह, राजनाथ उपाध्याय, रामेंद्र सिंह और अनिरुद्ध दुबे शामिल थे, उपस्थित रहे।




