लखनऊ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 1.55 करोड़ की ठगी, रिटायर्ड महिला डॉक्टर बनी शिकार
ATS–NIA अधिकारी बनकर ठगों ने डराया, घंटों तक वर्चुअल निगरानी में रखकर करवाए पैसे ट्रांसफर

नीरज सिंह
~ लखनऊ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 1.55 करोड़ की ठगी,
~ रिटायर्ड महिला डॉक्टर बनी शिकार
~ ATS–NIA अधिकारी बनकर ठगों ने डराया
~ घंटों तक वर्चुअल निगरानी में रखकर करवाए पैसे ट्रांसफर
लखनऊ। लखनऊ में साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगों ने एक रिटायर्ड महिला डॉक्टर से करीब 1.55 करोड़ रुपये ठग लिए। आरोप है कि ठगों ने खुद को ATS और NIA का अधिकारी बताकर महिला को गंभीर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया और फिर लगातार संपर्क में रखकर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए।
पुलिस के अनुसार, ठगों ने महिला को फोन कर बताया कि उनका नाम किसी बड़े अपराध से जुड़ा है और उन्हें तुरंत “डिजिटल अरेस्ट” किया जा रहा है। इसके बाद वीडियो कॉल और कॉल के जरिए उन्हें घंटों तक निगरानी में रखा गया, ताकि वह किसी और से संपर्क न कर सकें। इसी दौरान दबाव बनाकर बैंक डिटेल्स ली गईं और चरणबद्ध तरीके से बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली गई। मामले की जानकारी होने पर पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
■ क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’?
‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक धोखाधड़ी का तरीका है। इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ATS या NIA का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और कहते हैं कि आप किसी अपराध में शामिल हैं। फिर वीडियो कॉल या फोन पर ही “नजरबंदी” का नाटक करते हुए व्यक्ति को मानसिक दबाव में रखते हैं।
■ कैसे काम करता है यह फ्रॉड?
- ठग सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर कॉल करते हैं
- फर्जी केस या गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं
- वीडियो कॉल पर “नजरबंद” कर देते हैं
- पीड़ित को किसी से बात करने से रोकते हैं
- बैंक डिटेल्स लेकर पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं
■ कैसे बचें इस तरह की ठगी से?
- कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती
- OTP, बैंक डिटेल्स या पासवर्ड कभी किसी को न दें
- किसी भी डराने-धमकाने वाली कॉल पर तुरंत भरोसा न करें
- संदिग्ध कॉल आने पर कॉल काटें और परिजनों या पुलिस से बात करें
- तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे मामलों में सतर्क रहें और किसी भी अज्ञात कॉल पर घबराकर कोई वित्तीय लेनदेन न करें। जागरूकता ही इस तरह के साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
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