
आरिफ़ अंसारी, वाराणसी
वाराणसी स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान विभाग एवं इण्डियन एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट (आईएजे) के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में “विश्व की बदलती व्यवस्था – भारत की भूमिका” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सहभागिता रही।
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संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रो. प्रेम नारायण सिंह (निदेशक, अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र) ने अपने उद्बोधन में तकनीकी और भौतिक विकास के साथ-साथ समाज में बढ़ते मानसिक तनाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश ने तेजी से विकास किया है, लेकिन इसके समानांतर तनाव भी खतरनाक स्तर तक बढ़ा है। उन्होंने अपने विचारों को काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत करते हुए कहा कि “युद्ध पहले मानव के मस्तिष्क में जन्म लेता है, तभी वह धरातल पर उतरता है।”
प्रो. सिंह ने महात्मा गांधी और गौतम बुद्ध के अहिंसा सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने शास्त्र और शस्त्र दोनों की परंपरा को अपनाया है, लेकिन समय के साथ संतुलन बिगड़ा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे गांधी और बुद्ध के साथ-साथ क्रांतिकारी देशभक्तों के योगदान को भी समझें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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उन्होंने विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए सशक्त व्यक्तित्व के विकास पर जोर देते हुए कहा कि समाज में गुस्सा प्रायः कमजोरों पर ही निकलता है, इसलिए जरूरी है कि हम मजबूत और संतुलित व्यक्तित्व का निर्माण करें।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. शरद कुमार श्रीवास्तव, अशोक कुमार पाण्डेय (कार्यक्रम प्रमुख, आकाशवाणी), राजेश गौतम (पूर्व निदेशक, आकाशवाणी), प्रो. जितेंद्र कुमार, रामनरेश नरेश, राधा सिंह एवं अमन सिंह ने भी अपने विचार रखे और बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की।
संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. रमेश प्रसाद (संकाय अध्यक्ष, श्रमण विद्या संकाय) ने की, जबकि संचालन प्रो. राजनाथ (सामाजिक विज्ञान विभाग) ने किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन कैलाश सिंह विकास (राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईएजे) द्वारा दिया गया।
इस अवसर पर डॉ. जिनेश कुमार, चंद्रभान, डॉ. अमित कुमार दुबे, आकाश पाण्डेय, मोतीलाल गुप्ता, मोहम्मद दाऊद, आशीर्वाद सिंह, इंजीनियर रामनरेश नरेश, डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव, विक्रम कुमार, राजू वर्मा, विक्की वर्मा, अमित कुमार पाण्डेय, प्रकाश आचार्य, संजय कुमार पाण्डेय, तेजस कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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संगोष्ठी के माध्यम से वैश्विक परिवर्तनों के बीच भारत की भूमिका, चुनौतियों और संभावनाओं पर गंभीर मंथन किया गया।




