एफपीओ को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम, वाराणसी में आयोजित हुआ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
बीएचयू के कृषि वैज्ञानिकों ने दिए सफलता के मंत्र, किसानों की आय बढ़ाने और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर हुआ मंथन

धनेश्वर साहनी, संवाददाता, वाराणसी
वाराणसी। किसानों की आय में वृद्धि, कृषि क्षेत्र में आधुनिक प्रबंधन को बढ़ावा देने तथा कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से वाराणसी के टिकरी स्थित कृषक उत्पादक संगठन परिसर में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए एफपीओ प्रतिनिधियों को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रदेश भर से पहुंचे एफपीओ प्रतिनिधि
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषक उत्पादक संगठन के अध्यक्ष अनिल सिंह ने बताया कि यह संगठन प्रदेश के अग्रणी एफपीओ में शामिल है, जिसकी स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसानों को संगठित और सशक्त बनाने की परिकल्पना के अनुरूप की गई थी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले से दो-दो प्रमुख एफपीओ प्रतिनिधियों को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है।
बेहतर प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एफपीओ पदाधिकारियों को बेहतर प्रबंधन, लेखांकन, वित्तीय अनुशासन और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के बारे में जागरूक करना था। विशेषज्ञों ने बताया कि कई एफपीओ संसाधनों और तकनीकी जानकारी के अभाव में अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। ऐसे में अकाउंटेंसी, वित्तीय प्रबंधन और परियोजना निर्माण की जानकारी उन्हें अधिक सक्षम बना सकती है।
सरकारी योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की। इनमें नंदिनी योजना, फल एवं सब्जी उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज निर्माण, कृषि उत्पादों के संरक्षण और मूल्य संवर्धन से जुड़ी योजनाएं प्रमुख रहीं। प्रतिभागियों को बताया गया कि इन योजनाओं के माध्यम से एफपीओ को आर्थिक सहायता और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
तीन वर्षों तक सरकार वहन कर रही कर्मचारियों का मानदेय
अनिल सिंह ने बताया कि सरकार एफपीओ के कर्मचारियों, अकाउंटेंट, सलाहकारों और सीबीबीओ (Cluster Based Business Organization) से जुड़े कर्मियों के मानदेय का भुगतान तीन वर्षों तक कर रही है। उन्होंने एफपीओ पदाधिकारियों से अपील की कि वे इन सुविधाओं और योजनाओं का अधिकतम लाभ किसानों तक पहुंचाने का प्रयास करें।
युवाओं और तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रबंधन और बाजार आधारित कृषि मॉडल पर भी चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि एफपीओ में युवाओं और तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ाने से किसानों को नई तकनीकों और बाजार की बेहतर जानकारी मिल सकेगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।
500 किसान परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य
अनिल सिंह ने कहा कि यदि प्रत्येक एफपीओ कम से कम 500 किसान परिवारों को संगठित कर समूह के रूप में कार्य करे और “एक जनपद-एक उत्पाद” योजना के तहत स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दे, तो किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संगठित प्रयासों से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
किसानों के उज्ज्वल भविष्य का दिया संदेश
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को किसानों के हित में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करने, संगठनात्मक क्षमता बढ़ाने और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मिलकर कार्य करने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने विश्वास जताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम एफपीओ को नई दिशा देने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।




