Varanasi

जल संरक्षण की बात, लेकिन कुआँ बंद करने की तैयारी! परिवार ने उठाए सवाल, वैकल्पिक व्यवस्था के बिना कार्रवाई का आरोप

धनेश्वर साहनी, संवाददाता

~ वाराणसी के लंका में 60 साल पुराने कुएं को बंद करने की तैयारी?

~ परिवार ने उठाए सवाल, वैकल्पिक व्यवस्था के बिना कार्रवाई का आरोप

 

 

वाराणसी। एक ओर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, कुओं और पोखरों के संरक्षण को लेकर लगातार अभियान चला रही हैं, वहीं दूसरी ओर वाराणसी के लंका क्षेत्र में एक पुराने कुएं को बंद किए जाने की आशंका ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र के निवासी अभिषेक शंकर दुबे ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार द्वारा पिछले लगभग छह दशकों से उपयोग में लाए जा रहे कुएं को बिना किसी लिखित सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था के बंद करने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो परिवार के सामने गंभीर पेयजल संकट खड़ा हो जाएगा।

अभिषेक शंकर दुबे के अनुसार उनका परिवार करीब 60 वर्षों से इसी कुएं के पानी का उपयोग कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह कुआं केवल एक जल स्रोत नहीं, बल्कि उनके परिवार की दैनिक जीवनचर्या का अभिन्न हिस्सा है। उनके अनुसार परिवार के लगभग 20 सदस्य इसी कुएं के पानी पर निर्भर हैं और घर की अधिकांश जरूरतें इसी से पूरी होती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग ने कार्य एक निजी कंपनी को सौंपा है। कंपनी के कर्मचारियों ने उन्हें मौखिक रूप से 24 घंटे के भीतर वैकल्पिक पानी की व्यवस्था करने के लिए कहा। उनका दावा है कि यह भी चेतावनी दी गई कि यदि तय समय के भीतर व्यवस्था नहीं की गई तो कुएं में बालू भरकर उसे बंद कर दिया जाएगा।

अभिषेक का कहना है कि उन्हें इस संबंध में किसी भी सरकारी विभाग की ओर से न तो कोई लिखित नोटिस दिया गया है और न ही कोई आधिकारिक सूचना उपलब्ध कराई गई है। उनका कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवार को विधिवत सूचना देना और उसकी बात सुनना आवश्यक था।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार स्वयं जल संरक्षण और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निकायों को इसके लिए बजट उपलब्ध कराया जा रहा है तथा लोगों को पुराने जल स्रोतों को बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, तो ऐसे में वर्षों से उपयोग में आ रहे एक कुएं को बंद करने का निर्णय समझ से परे है।

अभिषेक शंकर दुबे ने प्रशासन से मांग की है कि यदि किसी सार्वजनिक परियोजना या विकास कार्य के कारण कुएं को बंद करना आवश्यक है, तो सबसे पहले प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी और सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके बाद ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाए।

उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने और बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए कुएं को बंद न किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर भी उसकी भावना के अनुरूप कार्य होना चाहिए।

फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि प्रशासन की ओर से कोई पक्ष या स्पष्टीकरण जारी होता है, तो उससे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई और निर्णय पर टिकी हुई है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button