गाजीपुर: मोहम्मदाबाद महिला अस्पताल की बदहाली, बुनियादी सुविधाओं के अभाव में मरीज परेशान, डॉक्टरों की कमी और उगाही के आरोप
राहुल पटेल, गाज़ीपुर

गाजीपुर, 18 सितंबर 2025: उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन जिले के मोहम्मदाबाद नगर क्षेत्र स्थित महिला अस्पताल की हालत इन दावों की पोल खोल रही है। तहसील मुख्यालय पर स्थित होने के बावजूद यह अस्पताल बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह वंचित है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को रोजमर्रा की भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और अनुचित वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, अस्पताल में रात के समय बिजली कटौती होने पर इन्वर्टर या वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव है, जिससे मरीजों का इलाज प्रभावित होता है। पीने के लिए आरओ वाटर का कोई इंतजाम नहीं है, जबकि शौचालयों की स्थिति इतनी खराब है कि मरीज उनका उपयोग करने से कतराते हैं। अस्पताल परिसर के पिछले हिस्से में फैली गंदगी हमेशा संक्रमण का खतरा पैदा करती रहती है। इसके अलावा, आवारा कुत्तों का अस्पताल परिसर में घूमना भी आम बात है, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा है।
डॉक्टरों की कमी यहां की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि रात के समय डॉक्टर अक्सर अनुपस्थित रहते हैं और अस्पताल केवल स्टाफ नर्सों व दाइयों के सहारे चलता है। इससे प्रसव जैसी गंभीर प्रक्रियाएं बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के कराई जाती हैं, जो मरीजों की जान को जोखिम में डाल सकती हैं। पुरानी रिपोर्ट्स के अनुसार, गाजीपुर जिले के महिला अस्पतालों में डॉक्टरों के पदों पर भारी कमी रही है। उदाहरण के लिए, 2020 में जिला महिला अस्पताल में 10 स्वीकृत पदों पर मात्र तीन डॉक्टर तैनात थे, जबकि मोहम्मदाबाद जैसे उप-जिला स्तर के अस्पतालों में स्थिति और भी बदतर बताई जाती है।
मरीजों से डिलीवरी के नाम पर 2000 से 4000 रुपये तक वसूलने के आरोप भी लगातार सामने आ रहे हैं। सरकारी स्टोर पर सस्ती दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिखी जाती हैं, जिससे उनका आर्थिक शोषण होता है।
एक सोशल मीडिया पोस्ट में राजकीय शिव पूजन राय अस्पताल, मोहम्मदाबाद (गाजीपुर) में सरकारी अधिकारियों द्वारा आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से अवैध वसूली का आरोप लगाया गया था, जहां वेतन भुगतान के बदले आधी सैलरी मांगने का दावा किया गया।
जिला स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर एम्बुलेंस सेवाओं (डायल 108 और 102) और हेल्पलाइन नंबरों (1800-180-5145) का उल्लेख है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
जनता का सवाल वाजिब है कि जब सरकार स्वास्थ्य विभाग पर इतना बड़ा बजट खर्च कर रही है, तो मोहम्मदाबाद जैसे महत्वपूर्ण तहसील स्तर के अस्पताल क्यों बदहाल हैं? यदि धन खर्च किया गया है तो सुविधाएं कहां गायब हो गईं, और यदि नहीं तो इसका जवाब कौन देगा? स्थानीय निवासी सीएमओ गाजीपुर से तत्काल जांच और सुधार की मांग कर रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन यह मुद्दा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है।




