Varanasi: गुरु रविदास जन्मस्थली क्षेत्र में जलभराव और गंदगी से लोग परेशान, नियमित सफाई व्यवस्था की उठी मांग
वीआईपी दौरे से पहले चमकता है इलाका, कार्यक्रम समाप्त होते ही लौट आती है बदहाली; स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी
वाराणसी। संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी की पावन जन्मस्थली क्षेत्र में जलभराव, गंदगी और बदहाल मूलभूत सुविधाओं को लेकर स्थानीय नागरिकों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जब भी गुरु रविदास जन्मस्थली पर दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, उससे पहले प्रशासन पूरे इलाके में व्यापक स्तर पर साफ-सफाई, सड़क मरम्मत, रंग-रोगन और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर देता है। लेकिन जैसे ही वीआईपी कार्यक्रम समाप्त होता है, क्षेत्र की स्थिति फिर से पहले जैसी बदहाल हो जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र की कई गलियों और सड़कों पर जलभराव की समस्या बनी हुई है। नालियां जाम होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है, जिससे लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। बरसात के मौसम में यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी की जन्मस्थली देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं, लेकिन गंदगी, जलभराव और अव्यवस्थित व्यवस्थाओं के कारण उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। इससे न केवल स्थानीय लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि धार्मिक स्थल की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि जन्मस्थली क्षेत्र में केवल वीआईपी दौरों के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष नियमित साफ-सफाई, जल निकासी, नालियों की सफाई, सड़क मरम्मत और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बरसात के दिनों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि गुरु रविदास जन्मस्थली जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल की गरिमा के अनुरूप क्षेत्र का नियमित रखरखाव कराया जाए, ताकि स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भी स्वच्छ, सुरक्षित और सुगम वातावरण उपलब्ध हो सके।




