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प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने दूसरी बार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति का संभाला कार्यभार

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 38वें कुलपति के रूप में ग्रहण किया दायित्व, 235 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने और शिक्षा में परंपरा-आधुनिकता के समन्वय का लिया संकल्प

हृदय नारायण पाण्डेय, वाराणसी

 

 

 

~ प्रो० बिहारी लाल शर्मा ने दूसरे कार्यकाल के लिए कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण किया

~ दूसरे कार्यकाल में संस्कृत विश्वविद्यालय को वैश्विक ज्ञान-केन्द्र बनाने का संकल्प

~ वैदिक मन्त्रोच्चार के बीच कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने सम्भाला कार्यभार, विद्यार्थी हित, शिक्षक नियुक्ति और लम्बित कार्यों का शीघ्र निस्तारण सर्वोच्च प्राथमिकता

 

वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने शनिवार को कुलपति कार्यालय में दूसरे कार्यकाल के लिए पुनः कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कार्यभार संभालते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रतिष्ठित करने का संकल्प व्यक्त किया।

कार्यभार ग्रहण करने के बाद कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि प्राच्य विद्या के इस प्राचीन केंद्र के कुलपति के रूप में पुनः दायित्व मिलना उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा उन पर पुनः व्यक्त किए गए विश्वास को उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक उत्तरदायित्व और विकास के संकल्प के रूप में स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि इस विश्वास को सार्थक करने के लिए अनुशासन, पारदर्शिता, समर्पण और निरंतर कर्मशीलता के साथ कार्य किया जाएगा।

235 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य

प्रो. शर्मा ने कहा कि काशी स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय 235 वर्षों से देवभाषा संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा की अविरल धारा को आगे बढ़ा रहा है। यह केवल एक शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि भारत की प्राच्य ज्ञान-संपदा का महत्वपूर्ण केंद्र है।

उन्होंने कहा कि दूसरे कार्यकाल में विश्वविद्यालय की इस गौरवशाली विरासत को संरक्षित करने के साथ संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक अकादमिक आवश्यकताओं से जोड़ते हुए वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

कुलपति ने कहा कि पिछले कार्यकाल में शुरू किए गए और लंबित रह गए कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालय की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई योजनाओं और विकास कार्यों को स्पष्ट कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

परंपरा और आधुनिकता के समन्वय पर जोर

कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को भारतीय परंपरा की जड़ों से जोड़े रखते हुए आधुनिक ज्ञान, तकनीक और समकालीन प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना समय की आवश्यकता है। परंपरा और आधुनिकता का समन्वय उनके दूसरे कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

उन्होंने विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की बात कही, ताकि उनकी शैक्षणिक और मूलभूत समस्याओं को समझकर उनका समयबद्ध समाधान किया जा सके। पठन-पाठन की व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक, गुणवत्तापूर्ण और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के साथ स्वच्छ पेयजल समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं को बेहतर करने पर भी जोर दिया जाएगा।

शिक्षकों की कमी दूर करना प्राथमिकता

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में शिक्षक और आचार्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिससे अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था प्रभावित हुई है। इस चुनौती को दूर करने के लिए निर्धारित विधिक प्रक्रिया के तहत शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षक नियुक्ति को प्राथमिकता मिलने से नियमित पठन-पाठन को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही शोध, प्रकाशन और अन्य अकादमिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

राजभवन के निर्देशों का होगा अक्षरशः पालन

प्रो. शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन राजभवन से प्राप्त प्रत्येक निर्देश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करेगा। प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को और मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्य को निर्धारित समयसीमा और नियमों के अनुरूप पूरा करने पर विशेष जोर रहेगा। विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों से विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी मिलकर इस प्राचीन ज्ञानपीठ को आधुनिक युग के अनुरूप सशक्त और प्रभावशाली ज्ञान-केंद्र बनाने में योगदान दें।

लंबित कार्यों के निस्तारण और अकादमिक विकास का संकल्प

कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि उनका दूसरा कार्यकाल गौरवशाली परंपरा के संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यार्थी हित, शिक्षक नियुक्ति, लंबित कार्यों के शीघ्र निस्तारण और विश्वविद्यालय को नई अकादमिक ऊंचाइयों तक ले जाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा।

38वें कुलपति के रूप में मिली पुनर्नियुक्ति

ज्ञातव्य है कि कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने 17 अगस्त 2026 को प्रो. बिहारी लाल शर्मा को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के 38वें कुलपति के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्ति आदेश जारी किया था।

इससे पहले प्रो. शर्मा ने 22 अगस्त 2023 को 37वें कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। पुनर्नियुक्ति के बाद उन्होंने 22 अगस्त 2026 को 38वें कुलपति के रूप में दूसरे कार्यकाल का कार्यभार संभाला।

विश्वविद्यालय के ये लोग रहे मौजूद

कार्यभार ग्रहण के दौरान कुलसचिव राकेश कुमार, कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. सुधाकर मिश्र, संकाय प्रमुख प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विजय कुमार शर्मा, जनसंपर्क अधिकारी शशीन्द्र मिश्र, सुनील कुमार चौधरी, प्रभुनाथ यादव सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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