मोबाइल में ‘मस्त’ डॉक्टर, अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं ‘ध्वस्त’! शिवपुर CHC में दोपहर 1 बजे पसरा सन्नाटा, मरीज इलाज के लिए परेशान
ओपीडी का समय सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक, फिर भी 1 बजे ही अधिकांश चैंबर बंद मिलने का आरोप; मरीज इलाज के लिए भटकते रहे, सवाल पूछने पर नाराज हुए डॉ० के.के. सिंह

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी
वाराणसी। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर किए जा रहे तमाम दावों के बीच शिवपुर स्थित शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि दोपहर करीब 1 बजे, जब अस्पताल की ओपीडी का समय चल रहा था, उस वक्त अस्पताल परिसर में मरीजों को अपेक्षित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही थीं और अधिकांश चैंबर बंद नजर आए।
सरकारी अस्पतालों में ओपीडी (Outpatient Department यानी बाह्य रोगी विभाग) आमतौर पर सोमवार से शनिवार सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होती है। ऐसे में दोपहर 1 बजे अस्पताल में चिकित्सकों की उपलब्धता और मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मौके की स्थिति को लेकर आरोप है कि अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीज इधर-उधर भटकते रहे। पूरे परिसर में महज एक कमरा खुला होने की बात सामने आई, जहां मौजूद डॉक्टर का ध्यान मरीजों की बजाय मोबाइल फोन पर होने का आरोप लगाया गया।
इसी दौरान चिकित्सकों की मौजूदगी और ड्यूटी को लेकर सवाल पूछे गए तो वहां मौजूद डॉ० के.के. सिंह के नाराज होने और तीखी प्रतिक्रिया देने की बात कही गई।
मामले में डॉक्टर मनोज कुमार दुबे ने बताया कि “सभी लोग आए हुए हैं, इधर-उधर होंगे।”
ऐसे में सवाल यह है कि यदि सभी चिकित्सक और कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद थे, तो ओपीडी के समय अधिकांश चैंबर बंद क्यों नजर आए और मरीजों को चिकित्सकीय सेवाएं किस स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही थीं?
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दोपहर 1 बजे का समय ओपीडी समाप्त होने से करीब एक घंटा पहले का है। ऐसे में यदि उस समय मरीजों को डॉक्टरों की तलाश करनी पड़े या स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त चिकित्सकीय गतिविधियां नजर न आएं, तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सरकारी अस्पतालों में बायोमेट्रिक उपस्थिति और निर्धारित समय पर मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए दिशा-निर्देश लागू हैं। ऐसे में अब यह जांच का विषय है कि घटना के समय कौन-कौन से डॉक्टर और कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद थे, उनकी बायोमेट्रिक उपस्थिति क्या थी और ओपीडी में मरीजों को किस तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं।
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अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर ड्यूटी के समय चिकित्सकों की मौजूदगी और मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की जांच कर उनके खिलाफ कार्यवाही करता है या नहीं।
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