Chandauli: डीडीयू मंडल में सुरक्षा का शानदार रिकॉर्ड, 6 महीने में एक भी रेल हादसा नहीं
अप्रैल से सितंबर तक दुर्घटना, डिरेलमेंट, सिग्नल ओवरशूट और समपार फाटक हादसे रहे शून्य; 250 से ज्यादा औचक जांचों से मजबूत हुई संरक्षा व्यवस्था

रंधा सिंह, संवाददाता, चन्दौली
चंदौली/डीडीयू। पूर्व मध्य रेल के अति व्यस्त पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल (डीडीयू मंडल) ने रेल संरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान मंडल में एक भी रेल दुर्घटना, ट्रेन के पटरी से उतरने, सिग्नल पार करने या समपार फाटक से जुड़ी दुर्घटना का मामला सामने नहीं आया। इस अवधि में उपकरणों से संबंधित फेल्योर भी शून्य रहा।
रेलवे के अनुसार, व्यस्त रेल मार्ग होने के बावजूद संरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी, निरीक्षण और विशेष सुरक्षा अभियानों पर जोर दिया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों की सतर्कता के साथ तकनीकी व्यवस्थाओं की नियमित जांच को भी प्राथमिकता दी गई।
डीआरएम के मार्गदर्शन में लगातार हुई निगरानी
मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना के मार्गदर्शन में मंडल के संरक्षा विभाग ने पिछले छह महीनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी की। इस दौरान रेलवे अधिकारियों की टीमों ने 250 से अधिक औचक और रात्रिकालीन निरीक्षण किए।
इन जांचों का उद्देश्य रेलवे परिचालन से जुड़े विभिन्न स्तरों पर सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति को परखना और संभावित खामियों की पहचान कर समय रहते उन्हें दूर करना रहा।
5 क्रॉस-फंक्शनल ऑडिट और 13 विशेष अभियान
रेलवे के मुताबिक संरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए इस अवधि में 5 क्रॉस-फंक्शनल ऑडिट भी किए गए। इसके अलावा अलग-अलग सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए 13 विशेष सुरक्षा अभियान चलाए गए।
इन अभियानों के माध्यम से परिचालन, इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं दूरसंचार और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय की समीक्षा की गई। रेलवे का जोर इस बात पर रहा कि किसी भी संभावित जोखिम को दुर्घटना का कारण बनने से पहले ही पहचानकर उसका समाधान किया जाए।
सभी 102 समपार फाटक मानवयुक्त
डीडीयू मंडल में संरक्षा को लेकर समपार फाटकों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। मंडल के सभी 102 समपार फाटकों पर मानवयुक्त व्यवस्था होने की बात रेलवे की ओर से कही गई है।
मानवयुक्त समपार फाटकों के जरिए रेल और सड़क यातायात के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने तथा संभावित दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में निगरानी की जा रही है।
दो साल में 120 संभावित खतरों की पहचान
रेलवे के अनुसार पिछले दो वर्षों के दौरान मंडल में 120 संभावित खतरों की पहचान समय रहते कर ली गई। इन खतरों को चिन्हित करने और उनका समाधान करने से संभावित बड़े हादसों को टालने में मदद मिली।
रेलवे की संरक्षा नीति का जोर केवल दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित जोखिमों की पहले से पहचान कर उन्हें खत्म करने पर है।
19 रेलकर्मियों को मिला सुरक्षा पुरस्कार
सुरक्षा व्यवस्था में कर्मचारियों की भूमिका को देखते हुए इस वर्ष 19 रेलकर्मियों को उनकी सतर्कता और बेहतर कार्य के लिए सुरक्षा पुरस्कार भी प्रदान किए गए। रेलवे के अनुसार ऐसे कर्मचारियों को सम्मानित करने का उद्देश्य अन्य कर्मचारियों को भी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
व्यस्त रूट पर सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल देश के महत्वपूर्ण और व्यस्त रेल मार्गों में शामिल है। ऐसे में यहां बड़ी संख्या में ट्रेनों का संचालन होता है और परिचालन व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखना रेलवे के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
रेलवे का कहना है कि संरक्षा कोई एक बार की उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इसलिए भविष्य में भी नियमित निरीक्षण, तकनीकी निगरानी, कर्मचारियों की सतर्कता और विशेष सुरक्षा अभियानों के माध्यम से संरक्षा मानकों को बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।
अप्रैल से सितंबर 2026 तक हादसों का शून्य आंकड़ा मंडल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।




