करंडा में वर्दी और दबंगई का गठजोड़ उजागर: मां-बेटों पर हमला, एफआईआर के बदले मांगे ₹30 हजार
पीड़िता ने एसपी से न्याय की गुहार लगाई, आरोप – कारखास सिपाही कर रहा है रिश्वतखोरी और दबंगों की मदद

राहुल पटेल, गाज़ीपुर
गाजीपुर। जिले के करंडा थाना क्षेत्र में एक बार फिर पुलिस और दबंगों की कथित मिलीभगत का मामला सामने आया है। धरम्मरपुर गांव की रहने वाली मंजू देवी पत्नी हरिनारायण यादव ने आरोप लगाया है कि गांव के ही कुछ दबंगों ने उनके घर में घुसकर लूटपाट और जानलेवा हमला किया, जबकि थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचीं तो वहां मौजूद सिपाही ने एफआईआर के बदले ₹30,000 रिश्वत की मांग की।
घर में घुसे दबंग, मां-बेटों को पीटा
घटना 24 अक्टूबर 2025 की शाम लगभग 6 बजे की बताई जा रही है। मंजू देवी के अनुसार, गांव के ओमप्रकाश यादव पुत्र दधिवल, पिंटू यादव, अजय यादव पुत्र परभू यादव, शीला देवी पत्नी ओमप्रकाश, और निरंजनी देवी पत्नी परभू यादव लाठी-डंडे, चाकू और लोहे के कड़े से लैस होकर उनके घर में घुस आए।
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मंजू देवी का आरोप है कि दबंगों ने न केवल उन्हें गालियां दीं, बल्कि गले से मंगलसूत्र छीन लिया और बाल पकड़कर बाहर घसीट लाए। जब उन्होंने बताया कि उनके बेटे घर के बाहर हैं, तो दबंगों ने धर्मजीत यादव पर चाकू से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।
इसी दौरान उनका दूसरा बेटा रंजीत यादव जब बचाने पहुंचा, तो उस पर भी लोहे के कड़े से वार किया गया, जिससे उसका सिर फट गया।
थाने पहुँची तो ’कारखास’ ने मांगी गई रिश्वत
पीड़िता ने घटना के बाद तुरंत 112 नंबर पर सूचना दी। मौके पर पुलिस पहुंची और घायलों को थाने बुलाया गया। लेकिन जब मंजू देवी अपने बेटों के साथ करंडा थाना पहुँचीं, तो वहां तैनात सिपाही मान सिंह ने कथित तौर पर कहा – “तीस हजार रुपये दो, तभी एफआईआर लिखी जाएगी, वरना यहां से निकल जाओ।”
मंजू देवी का कहना है कि जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया, तो पुलिस ने उनकी कोई बात नहीं सुनी और उन्हें थाने से भगा दिया।
विवादों में पहले भी रहा है सिपाही मान सिंह
स्थानीय लोगों के अनुसार, सिपाही मान सिंह थाना करंडा के प्रभारी का “कारखास” बताया जाता है और उस पर पहले भी कई बार भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लग चुके हैं। कुछ महीने पहले क्षेत्र के पत्रकार अमित उपाध्याय ने इसी सिपाही की कथित रिश्वतखोरी को उजागर किया था। बाद में उसी सिपाही ने पत्रकार पर ₹10,000 लेकर झूठी एफआईआर दर्ज कराने का आरोप झेला था।
थानाध्यक्ष का रटा रटाया जवाब– “कोई रिश्वत नहीं मांगी गई”
इस मामले में थानाध्यक्ष राजनरायन ने रिश्वतखोरी के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि – “पीड़ित पक्ष को मेडिकल के लिए भेजा गया था। अगले दिन बुलाया गया, लेकिन वे थाने से जानबूझकर भाग गए और बाहर खड़े होकर वीडियो बना रहे थे। किसी को भगाया नहीं गया है।”
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गाज़ीपुर कप्तान से पीड़िता ने लगाई न्याय की गुहार
वहीं, पीड़िता मंजू देवी ने अब जिला पुलिस अधीक्षक से मिलकर सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
गांव में इस घटना को लेकर गुस्सा व्याप्त है। लोगों का कहना है कि करंडा थाने में अब न्याय नहीं, बल्कि रिश्वत का रेट तय है। ग्रामीणों ने भी उच्च अधिकारियों से थाने में फैले भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की है।




