सर्पदंश ने छीनी 12 वर्षीय मासूम की जान, जागरूकता और समय पर इलाज से बच सकती थी जिंदगी
सिंधोरा के सिंधौरा गांव की घटना, विशेषज्ञ बोले—झाड़-फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल पहुंचाना ही है जीवन बचाने का रास्ता

रिपोर्ट: विवेक राय।
वाराणसी। सिंधोरा थाना क्षेत्र के सिंधौरा गांव में सर्पदंश से 12 वर्षीय बालक की मौत का हृदयविदारक मामला सामने आया है। बुधवार तड़के करीब 1 बजे घर में सो रहे मयंक मौर्य (12), पिता सदानंद मौर्य व माता माया मौर्य को जहरीले सर्प ने काट लिया। परिजनों ने बालक को बचाने का प्रयास किया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
घटना के बाद सर्वेश वन्य जीव संरक्षण संस्थान के अध्यक्ष सर्वेश कुमार ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सर्पदंश से होने वाली अधिकांश मौतों को समय पर सही उपचार और जागरूकता के जरिए रोका जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सर्प काटने की स्थिति में झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं, बल्कि पीड़ित को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या सर्पदंश उपचार सुविधा वाले स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण हर वर्ष कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। यदि समय पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध अस्पताल में उपचार शुरू हो जाए, तो अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
संस्थान ने लोगों से घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, घास-फूस और कचरे के ढेर से बचने, रात में टॉर्च का प्रयोग करने तथा बच्चों को सर्पों से सावधान रहने के लिए जागरूक करने की अपील की है। साथ ही, यदि कहीं सर्प दिखाई दे तो उसे मारने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई है, ताकि उसका सुरक्षित रेस्क्यू कर प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके।
सर्वेश वन्य जीव संरक्षण संस्थान ने कहा कि संस्था लगातार जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सर्पदंश से बचाव, सही प्राथमिक उपचार और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही है। संस्था ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और दूसरों को भी जागरूक करें, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।




