सेवानिवृत्ति से पहले नगर पंचायत लिपिक पर गंभीर आरोप, पूर्व सभासद ने डीएम से पेंशन रोकने की मांग की
भ्रष्टाचार और गबन के पुराने मामलों का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग, लिपिक बोले— राजनीतिक द्वेषवश फंसाया गया।

रिपोर्ट: आकाश पाण्डेय।
सैदपुर, गाजीपुर। इसी माह के अंत में सेवानिवृत्त होने जा रहे नगर पंचायत सैदपुर के लिपिक सुरेंद्र सोनकर एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पूर्व सभासद राजेश सोनकर ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर लिपिक की पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर रोक लगाने के साथ पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पूर्व सभासद का आरोप है कि सुरेंद्र सोनकर के विरुद्ध पूर्व से भ्रष्टाचार, गबन और रिश्वतखोरी से जुड़े मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। ऐसे में जांच पूरी होने तक उन्हें मिलने वाले सेवानिवृत्ति लाभों पर रोक लगाई जानी चाहिए। 1शिकायती पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2018 में नगर पंचायत की कूड़ा डंपिंग के लिए भूमि खरीद और अन्य मामलों में सुरेंद्र सोनकर के खिलाफ भ्रष्टाचार और गबन के आरोपों में मुकदमे दर्ज हुए थे।
इसके अलावा मृतक आश्रित को नौकरी दिलाने के मामले में एंटी करप्शन टीम द्वारा कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। पूर्व सभासद ने दावा किया है कि आरोपी लिपिक करीब 90 दिन तक जेल में रहे, लेकिन विभागीय जांच और निलंबन की कार्रवाई के बिना दोबारा सेवा में लौट आए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सेवा काल के दौरान ठेकेदारों और आम लोगों से कथित रूप से अवैध धन लेकर चल-अचल संपत्ति अर्जित की गई।
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि नगर निधि के कथित गबन और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक लिपिक की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान पर रोक लगाई जाए।वहीं, नगर पंचायत लिपिक सुरेंद्र सोनकर ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट से कार्यवाही पर रोक मिली हुई है।
उनका कहना है कि उन्हें राजनीतिक द्वेष के चलते झूठे मामलों में फंसाया गया है और उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। फिलहाल पूरे मामले में अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी और न्यायालय के स्तर पर होना शेष है।
नोट: (पत्रकारिता के लिहाज़ से): इस खबर में आरोपों को स्पष्ट रूप से “आरोप”, “शिकायती पत्र”, “कथित” जैसे शब्दों के साथ प्रस्तुत किया गया है और संबंधित पक्ष (सुरेंद्र सोनकर) का पक्ष भी शामिल किया गया है। इससे रिपोर्ट संतुलित और कानूनी दृष्टि से अधिक सुरक्षित रहती है।




