मीट, मछली और मुर्गा दुकानों को शहर से बाहर करने के प्रस्ताव के खिलाफ प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
छोटे कारोबारियों की आजीविका और बनारस की साझा संस्कृति पर हमला बताया, निर्णय वापस लेने की मांग

अजय त्रिपाठी, वाराणसी
वाराणसी, 30 जून। नगर निगम वाराणसी द्वारा शहर की मीट, मछली और मुर्गे की दुकानों को नगर निगम सीमा से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के विरोध में सोमवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों, नागरिकों और दुकानदारों ने नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मंडलायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह फैसला हजारों छोटे कारोबारियों की आजीविका, आम नागरिकों की सुविधा और बनारस की बहुसांस्कृतिक पहचान के खिलाफ है।
‘रोजगार बढ़ाने की बजाय रोजगार छीना जा रहा’
प्रदर्शन के दौरान स्त्री मुक्ति लीग की प्रतिनिधि लता ने कहा कि देश पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में सरकार और नगर निगम का दायित्व नए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि पहले से स्थापित छोटे कारोबारों को खत्म करना।
उन्होंने कहा कि मीट, मछली और मुर्गा विक्रेताओं से केवल दुकानदार ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएं, कर्मचारी और उनके परिवार भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर डालेगा। यदि स्वच्छता संबंधी कोई समस्या है तो उसका समाधान दुकानों को हटाना नहीं बल्कि आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराकर वैज्ञानिक तरीके से उनका संचालन सुनिश्चित करना होना चाहिए।
‘बेरोजगार युवाओं के लिए भी चिंता का विषय’
दिशा छात्र संगठन की ओर से ध्रुव ने कहा कि वर्तमान समय में लाखों युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। ऐसे में जो छोटे व्यवसाय लोगों को सम्मानजनक जीवनयापन का अवसर दे रहे हैं, उन्हें समाप्त करने का प्रयास जनविरोधी है।
उन्होंने कहा कि यह केवल दुकानदारों का मुद्दा नहीं बल्कि छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों का भी प्रश्न है। बनारस की पहचान उसकी विविध संस्कृति, सामाजिक समरसता और विभिन्न समुदायों के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व से बनी है। किसी एक विचारधारा को समाज पर थोपना लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक भावना के विपरीत है। नगर निगम को सभी पक्षों से संवाद स्थापित कर ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे स्वच्छता भी बनी रहे और किसी की रोजी-रोटी भी प्रभावित न हो।
ज्ञापन में रखी गईं प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में मांग की कि नगर निगम मीट, मछली और मुर्गा दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को तत्काल वापस ले। साथ ही शहर के सभी मांस एवं मछली विक्रेताओं का सर्वे कर उन्हें वैधानिक मान्यता प्रदान की जाए।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के प्रावधानों के अनुरूप इन दुकानदारों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा दुकानों के लिए स्वच्छता, शीत भंडारण (कोल्ड स्टोरेज), पेयजल, बिजली और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की मांग भी उठाई गई।
‘जनसंवाद के बाद ही लिया जाए फैसला’
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जनजीवन और हजारों लोगों की आजीविका से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय एकतरफा नहीं लिए जाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि नगर निगम किसी भी नीति को लागू करने से पहले संबंधित पक्षों, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से व्यापक संवाद करे तथा सर्वसम्मति से ऐसा समाधान निकाले जिससे शहर की स्वच्छता भी बनी रहे और लोगों की आजीविका भी सुरक्षित रह सके।
प्रदर्शन के दौरान सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं, छात्र नेताओं, स्थानीय नागरिकों और बड़ी संख्या में दुकानदारों ने नगर निगम के प्रस्ताव के खिलाफ अपनी एकजुटता दिखाई और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।




