गंगा का जलस्तर 63 मीटर के पार, गंगा-वरुणा के किनारे बसे लोगों की बढ़ी मुश्किलें, आरती का स्थान बदला, नाव संचालन पर सख्ती

~ बढ़ते जलस्तर से वाराणसी में बदली घाटों की तस्वीर, आरती स्थल बदला, नाव संचालन पर सख्ती
~ बढ़ते जलस्तर से नाविकों और पुरोहितों की बढ़ीं मुश्किलें, सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट
~ वाराणसी में गंगा का चेतावनी स्तर 70.26 मीटर, जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर है
वाराणसी। पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के बीच वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब काशी के घाटों, संपर्क मार्गों, नाव संचालन और धार्मिक आयोजनों पर साफ दिखाई देने लगा है। बीते 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में करीब तीन फीट तक की बढ़ोतरी दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार वाराणसी में गंगा का जलस्तर 63.72 मीटर पहुंच गया है। लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
केंद्रीय जल आयोग से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वाराणसी में गंगा का चेतावनी स्तर 70.26 मीटर, जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर है।
जलस्तर बढ़ने के साथ ही काशी के कई प्रमुख घाटों की तस्वीर बदल गई है। घाटों से जुड़े संपर्क मार्गों पर गंगा का पानी पहुंचने लगा है, जिससे एक घाट से दूसरे घाट तक आने-जाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार सुबह तुलसी घाट से पम्पवा घाट की ओर जाने वाले प्लेटफॉर्म पर भी पानी पहुंच गया। इसके अलावा दशाश्वमेध घाट से अहिल्याबाई घाट समेत कई अन्य घाटों के बीच के संपर्क मार्ग भी पानी में डूब गए हैं।
दशाश्वमेध घाट पर आरती स्थल बदला
गंगा के बढ़ते जलस्तर का सीधा असर काशी की प्रसिद्ध गंगा आरती पर भी पड़ा है। पहले अस्सी घाट पर आरती स्थल बदला गया था और अब बढ़ते पानी को देखते हुए दशाश्वमेध घाट पर भी निर्धारित आरती स्थल से करीब 15 फीट ऊपर आरती कराई जा रही है। प्रशासन की ओर से लगातार जलस्तर की निगरानी की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।
बाहरी नावों पर रोक, लाइफ जैकेट अनिवार्य
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती के दौरान बाहरी नावों को लगाने पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने नाविकों के साथ बैठक कर सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। नाविकों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि बिना लाइफ जैकेट किसी भी पर्यटक या श्रद्धालु को नाव पर न बैठाया जाए। साथ ही नाव की निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने पर भी रोक लगा दी गई है।
नाविक शंभु निषाद ने कहा कि प्रशासन की ओर से सुरक्षा को लेकर जो भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं, उनका सभी नाविक पालन करेंगे। प्रशासन का जोर फिलहाल नाव संचालन के दौरान किसी भी संभावित हादसे को रोकने पर है।
नाविकों और पुरोहितों की बढ़ी चिंता
गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों पर धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित होने लगी हैं। अस्सी घाट के पुजारी बलिराम मिश्र के मुताबिक लगातार बढ़ते पानी के कारण घाट किनारे रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी सावधानी बरतनी पड़ रही है। पानी बढ़ने के कारण घाटों पर होने वाले नियमित पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।
वहीं, नाविकों के सामने भी रोजी-रोटी को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो नाव संचालन पर और अधिक प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना है। ऐसे में घाटों पर पर्यटन और नाव संचालन से जुड़े लोगों की आमदनी प्रभावित हो सकती है।
प्रशासन की सुरक्षा पर नजर
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। घाटों पर लोगों को गहरे पानी में जाने से बचने, नावों में क्षमता से अधिक सवारियां न बैठाने और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करने की हिदायत दी जा रही है।
प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल श्रद्धालुओं, पर्यटकों, नाविकों और घाट किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यदि गंगा का जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में नाव संचालन पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। ऐसे में काशी के घाटों की गतिविधियों के साथ-साथ नाविकों, पुरोहितों और स्थानीय कारोबारियों के सामने भी नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।




